छत्तीसगढ़

CG बर्खास्त ब्रेकिंग : जेडी ने की बड़ी कार्रवाई, शिक्षक को किया बर्खास्त, इस वजह से हुई सेवा समाप्त……

बिलासपुर। 26 अक्टूबर 2026| शिक्षिका से छेड़खानी के आरोप में जेएमएफसी कोर्ट से एक साल का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा के फैसले के बाद जेडी बिलासपुर संभाग ने शिक्षक को बर्खास्त कर दिया है। बता दें, NPG.NEWS ने इस संबंध लगातार खबरें प्रकाशित की थी।

पढ़िए जेडी ने बर्खास्तगी आदेश में क्या लिखा है?

जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर के पत्र 21 अक्टूबर 2026 के अनुसार विवेक गुप्ता उच्च वर्ग शिक्षक शा. पूमावि. बेलमुण्डी वि.खं. तखतपुर जिला बिलासपुर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, तखतपुर जिला बिलासपुर द्वारा दाण्डिक प्रकरण में पारित निर्णय 26 सितंबर 2026 अनुसार भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354 एवं 323 के अंतर्गत दोषसिद्ध किया गया है। उक्त निर्णय में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354 के अंतर्गत एक वर्ष का सश्रम कारावास एंव 1000 रू अर्थदण्ड तथा धारा 323 के अंतर्गत 1000 रू. अर्थदण्ड से दण्डित किया गया हैं। साथ ही न्यायालय द्वारा जारी दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के अंतर्गत प्रमाण पत्र के अनुसार विवेक गुप्ता. 07 अगस्त 2018 से 09 अक्टूबर 2018 तक कुल 02 माह 02 दिवस न्यायिक अभिरक्षा में रहे हैं।

अतः छ.ग. सिविल सेवा आचरण नियम (वर्गीकरण, नियंत्रण एंव अपील) 1966 के नियम 10 (नौ) के तहत विवेक गुप्ता उच्च वर्ग शिक्षक शा. पूमावि. बेलमुण्डी वि.खं. तखतपुर जिला बिलासपुर को न्यायालय द्वारा दण्डित किये जाने के फलस्वरूप भूतलक्षी प्रभाव से 26.सितंबर 2026 सेवा से पदच्युत (Dismissal of Service) किया जाता हैं। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

जानिए क्या है मामला?

यह पूरा शर्मनाक वाकया 17 फरवरी 2018 को सुबह साढ़े ग्यारह से दोपहर बारह बजे के बीच तखतपुर ब्लॉक के एक सरकारी स्कूल में पेश आया था। वहां तैनात एक महिला शिक्षिका ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि शिक्षक विवेक गुप्ता ने न केवल उनका हाथ खींचकर बदसलूकी की, बल्कि उनके सीने पर हाथ लगाकर चरित्र पर कीचड़ उछाला और गंदी-गंदी गालियां दीं। जब पीडि़ता ने इस घिनौनी हरकत का विरोध किया, तो आरोपी ने उनके साथ मारपीट करते हुए दीवार की तरफ धक्का दे दिया, जिससे उनके सिर और चेहरे पर गंभीर जख्म हो गए। इतना ही नहीं, महिला शिक्षिका को तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकियां भी दी गई थी।

पुलिस ने फौरन एफआईआर दर्ज कर मामला कोर्ट में पेश किया। इस बीच आरोपी शिक्षक को विवादित होने के चलते तखतपुर के ही बेलमुंडी स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया। लंबी चली कानूनी सुनवाई के बाद तखतपुर कोर्ट की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने 26 सितंबर को फैसला सुनाया। अदालत ने अर्चना विहार, नेहरू नगर निवासी शिक्षक विवेक गुप्ता को आईपीसी की धारा 354 के तहत एक साल का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 323 के तहत भी एक हजार का जुर्माना ठोका गया, जिसमें जुर्माने की राशि न चुकाने पर एक-एक महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया। नियम के मुताबिक सजा के तुरंत बाद विभाग को एक्शन लेना था, पर मास्टर साहब आराम से स्कूल में लेक्चर दे रहे हैं।

अदालत के फैसले को आए तीन हफ्ते से ज्यादा गुजर गए, लेकिन तखतपुर के बेलमुंडी स्कूल में पदस्थ विवेक गुप्ता बेफिक्री के साथ अपनी नौकरी बजा रहा है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 19 साफ निर्देश देते हैं कि यदि किसी कर्मचारी को कोर्ट से सजा हो जाए, तो लंबी-चौड़ी विभागीय जांच की कोई जरूरत नहीं होती। सीधेतौर पर बर्खास्तगी की तलवार लटक जानी चाहिए थी, लेकिन अफसरों की उदासीनता के चलते अपराधी किस्म का शख्स खुलेआम घूम रहा है। डीईओ का यह कहना कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं है, पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर एक बड़ा धब्बा है।

नियम 19 के तहत महिलाओं से जुड़े अपराध या नैतिक पतन के मामलों में अदालत से सजा मिलने पर बिना किसी देरी के सीधे सेवा से बाहर यानी बर्खास्त करने का प्रावधान है, जिसमें किसी लंबी इंक्वायरी की आवश्यकता नहीं होती।

कागजी प्रक्रिया पूरी न होने तक भले ही वह स्कूल पहुंच रहा हो, लेकिन कानूनी और नैतिक रूप से एक सजायाफ्ता मुजरिम का मासूम बच्चों के बीच खड़े होकर पढ़ाना सीधेतौर पर कानून का मजाक उड़ाना और गंभीर कदाचार है।

सिर्फ अपील दायर कर देने मात्र से निचली अदालत का फैसला स्वत: रद्द नहीं हो जाता। जब तक उच्च न्यायालय से ‘दोषसिद्धि पर रोक’ का आदेश नहीं मिल जाता, तब तक वह कागजों और कानून की नजर में दोषी ही माना जाएगा।

Related Articles

Back to top button