
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम बोराई में स्थित आधा मांझी मंदिर अपनी अनोखी पहचान के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहाँ स्थापित एक ही पिंड में विराजमान दो शिवलिंग, जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। सावन के महीने में यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
घने जंगलों के बीच स्थित बोराई का आधा मांझी मंदिर आस्था, प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम है। मंदिर की सबसे बड़ी पहचान यहाँ स्थापित डबल शिवलिंग है। मान्यता है कि एक शिवलिंग भगवान भोलेनाथ और दूसरा माता पार्वती का प्रतीक है। इसी कारण इसे स्थानीय लोग आधा मांझी या अर्धनारीश्वर स्वरूप के नाम से जानते हैं।
ग्रामीणों की मान्यता है कि इस मार्ग से गुजरने वाला कोई भी व्यक्ति बिना माथा टेके आगे नहीं बढ़ता। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना भगवान भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं।

मंदिर के पुजारी के अनुसार यहाँ 1965 से लगातार पूजा-अर्चना होती आ रही है। पहले उनके पिता पूजा करते थे और अब पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा निभाई जा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर का इतिहास इससे भी कहीं अधिक पुराना है। पहले यहाँ झोपड़ी और पतेरे की छावनी थी, बाद में वर्ष 2012 में शासन की सहायता से मंदिर की छत का निर्माण कराया गया।
सावन का महीना इस मंदिर का सबसे बड़ा पर्व होता है। धमतरी, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बीजापुर, देवभोग सहित ओडिशा से भी बड़ी संख्या में कांवड़िए और शिवभक्त यहाँ जलाभिषेक करने पहुँचते हैं। दर्शन के बाद श्रद्धालु सिहावा स्थित महानदी और गणेश्वर मंदिर के लिए भी रवाना होते हैं।
हालांकि आस्था के इस प्रमुख केंद्र में आज भी बिजली, पेयजल और श्रद्धालुओं के ठहरने जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीण और मंदिर समिति शासन से यहाँ आवश्यक सुविधाएँ विकसित करने की मांग कर रहे हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सके।
आस्था और प्रकृति के बीच बसे बोराई के आधा मांझी मंदिर का यह अनोखा डबल शिवलिंग श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। हर साल सावन में यहाँ हजारों भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। अब जरूरत है कि इस धार्मिक स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


