छत्तीसगढ़

CG – “बस्तर का युवा अब खदान में ‘मजदूर’ नहीं, ‘माइनिंग इंजीनियर’ बनेगा: आदित्य सिंह बिसेन ने सौंपा विजन डॉक्युमेंट”…

“बस्तर का युवा अब खदान में ‘मजदूर’ नहीं, ‘माइनिंग इंजीनियर’ बनेगा: आदित्य सिंह बिसेन ने सौंपा विजन डॉक्युमेंट”

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सिंह बिसेन ने आज शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर विश्वविद्यालय) के कुलपति को एक युगांतरकारी प्रस्ताव सौंपते हुए बस्तर की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव की मांग की है। एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय में तत्काल प्रभाव से 7 नए रोजगारपरक और खनिज आधारित पाठ्यक्रम (Job-oriented Mining Courses) शुरू करने का प्रस्ताव रखा है।

संसाधन स्थानीय, तो रोजगार भी स्थानीय हो (Local Resources – Local Employment):

एनएसयूआई उपाध्यक्ष आदित्य सिंह बिसेन ने कहा कि बस्तर को ‘एशिया का रूर’ (Ruhr of Asia) कहा जाता है। हमारी धरती के गर्भ में बैलाडीला का लोहा, तोंगपाल का टिन और तोकापाल का हीरा है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यहाँ का स्थानीय युवा केवल खदानों में खुदाई करने वाला अकुशल श्रमिक (Unskilled Labor) बनकर रह गया है, जबकि तकनीकी पदों और इंजीनियरिंग के लिए लोग बाहर से बुलाए जाते हैं।

इन 7 कोर्सेस से बदलेगी बस्तर की तस्वीर:

ज्ञापन में एनएसयूआई ने बस्तर की भौगोलिक और औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए निम्नलिखित विभागों की स्थापना की मांग की है:-

माइनिंग एंड जियोलॉजी (B.Tech/Diploma): ताकि बस्तर का युवा माइनिंग इंजीनियर और सर्वेयर बन सके।

जेमोलॉजी (रत्न विज्ञान): बस्तर के हीरे और कोरंडम की कटिंग और पॉलिशिंग यहीं हो, जिससे इसकी कीमत 100 गुना बढ़े।

ड्रोन टेक्नोलॉजी और जीआईएस: खदानों के ‘स्मार्ट सर्वे’ के लिए युवाओं को तैयार करना।

मेटलर्जी (धातु विज्ञान): ताकि एनएमडीसी और स्टील प्लांट्स के लिए मेटलर्जिस्ट यहीं तैयार हों।

हैवी मशीनरी मेंटेनेंस: करोड़ों की मशीनों को सुधारने के लिए ‘हाई-टेक मैकेनिक’ तैयार करना।

इंडस्ट्रियल सेफ्टी: सेफ़्टी ऑफिसर के पदों पर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति हेतु।

लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट: बस्तर को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए।

नक्सलवाद पर ‘शिक्षा’ की चोट

बिसेन ने जोर देकर कहा कि जब बस्तर के युवा के हाथ में आधुनिक तकनीकी डिग्री और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी होगी, तो वह मुख्यधारा के विकास का सबसे बड़ा वाहक बनेगा। यह पहल बस्तर में ‘ब्रेन ड्रेन’ और पलायन को रोकने में मील का पत्थर साबित होगी।

विश्वविद्यालय बने ‘कौशल’ का केंद्र

एनएसयूआई ने कुलपति से मांग की है कि बस्तर को अब केवल कच्चे माल का निर्यातक (Exporter) नहीं, बल्कि ‘स्किल हब’ बनाना होगा। संगठन ने इन पाठ्यक्रमों को आगामी सत्र से शुरू करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति और बजट की मांग की है।

इस दौरान मुख्य रूप से शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के NSUI अध्यक्ष पंकज केवंट, वरिष्ठ छात्र नेता नूरेंद्र राज साहू, पीजी कॉलेज अध्यक्ष कर्तव्य आचार्य,जिला सचिव कुणाल पांडे, NSUI सोशल मीडिया संयोजक किस्सू बघेल,जिला सचिव दीपेश पांडे, तन्मय चौहान, रिहान खान, समीर कुमार,आदित्य,तरुण एवं अन्य उपस्थित थे।

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