राजनांदगांव जिले में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (NSSK) पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन

राजनांदगांव जिले में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (NSSK) पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन
राजनांदगांव: मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, राजनांदगांव स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से 8 अक्टूबर 2026 को जिला चिकित्सालय, राजनांदगांव में जिला स्तरीय ‘नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम’ (NSSK) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य लक्ष्य नवजात मृत्यु दर (NMR) को कम करना, जन्म के उपरांत आवश्यक नवजात देखभाल (Essential Newborn Care) सुनिश्चित करना एवं सुरक्षित रेफरल प्रणाली को प्रभावी बनाना है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एन आर नवरत्नके मार्गदर्शन में संपन्न इस प्रशिक्षण सत्र में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के 45 स्वास्थ्य कर्मियों, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) तथा स्टाफ नर्स सम्मिलित थे, जिनको प्रशिक्षित किया गया। इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को नवजात शिशुओं की समुचित देखभाल, पुनर्जीवन (Newborn Resuscitation), संक्रमण नियंत्रण एवं समयबद्ध सुरक्षित रेफरल प्रक्रियाओं में दक्ष बनाना था।
खतरे के संकेतों की पहचान: प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं में खतरे के प्रमुख लक्षणों, जैसे तीव्र श्वसन, सुस्ती, स्तनपान न कर पाना, छाती का धंसना और शरीर का तापमान गिरना, की पहचान हेतु विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया। उन्हें निर्देशित किया गया कि ऐसे लक्षण परिलक्षित होने पर अविलंब आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जाए।
व्यावहारिक अभ्यास: डमी (Mannequin) के माध्यम से जन्म के समय श्वास न ले पाने वाले नवजात शिशुओं हेतु पुनर्जीवन प्रक्रिया (Resuscitation) का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही, कम वजन (Low Birth Weight) और समय से पूर्व जन्मे (Preterm) शिशुओं के लिए कंगारू मदर केयर (KMC) की महत्ता पर विस्तृत चर्चा की गई।
भ्रांतियों का निवारण: समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों के निराकरण एवं परिवारों को सटीक जानकारी प्रदान करने पर बल दिया गया। प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान, छह माह तक केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding), नाभि की सुरक्षा और हाइपोथर्मिया प्रबंधन द्वारा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
यह प्रशिक्षण यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ.श्री गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व एवं सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ। प्रशिक्षण सत्र के दौरान RMNCHA कंसल्टेंट डॉ स्नेहा जैन, डॉ विकास राठौर जिला गैर संचारी रोग सलाहकार तथा हॉस्पिटल कंसल्टेंट श्री अविन चौधरी द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों से संस्थागत प्रसव के समय निर्धारित तकनीकी प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा समुदाय, माताओं एवं परिवारों को नवजात शिशु की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक शिशु के जीवन को सुरक्षित बनाया जा सके।



