डायवर्सन की फाइल या लेन-देन का रास्ता?सहसपुर लोहारा SDM कार्यालय के लिपिक पर रिश्वत मांगने का गंभीर शिकायत।

कवर्धा/सहसपुर लोहारा।राजस्व विभाग में भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया को लेकर सहसपुर लोहारा SDM कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। संतोष जयसवाल,पिता जकनू राम,निवासी ग्राम दरिगवां,तहसील सहसपुर लोहारा ने 17 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर कबीरधाम को शिकायत सौंपकर SDM कार्यालय के लिपिक आशुतोष श्रीवास्तव पर कथित रूप से रिश्वत मांगने और डायवर्सन प्रकरण को लंबित रखने के आरोप लगाए हैं।
शिकायत के मुताबिक,आवेदक की माता उदसा बाई पति जकनू राम की भूमि खसरा नंबर 656/6, रकबा 0.0240 हेक्टेयर के आवासीय प्रयोजन के लिए ऑनलाइन भूमि डायवर्सन हेतु आवेदन किया गया था। आवेदक का कहना है कि निर्धारित ई-चालान का भुगतान कर सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए गए थे और SDM कार्यालय में दस्तावेजों का अवलोकन भी कराया गया।
लेकिन शिकायत में आरोप लगाया गया है कि SDM कार्यालय के लिपिक आयुतोष श्रीवास ने खाली भूमि पर लगभग ₹75 हजार का चालान आने की बात कही। बाद में राजस्व निरीक्षक से जानकारी लेने पर किसी अतिरिक्त चालान की पुष्टि नहीं होने का दावा शिकायतकर्ता ने किया। शिकायतकर्ता के अनुसार,SDM से मुलाकात करने पर भी अतिरिक्त चालान की बात सामने नहीं आई।
शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा कथित लेन-देन से जुड़ा है। आवेदक ने आरोप लगाया है कि डायवर्सन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए उससे ₹30 हजार की मांग की जा रही है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि वह संबंधित लिपिक को ₹15 हजार नकद पहले ही दे चुका है,लेकिन इसके बावजूद उससे और रकम की मांग की जा रही है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवेदन के 116 दिन बीत जाने के बाद भी उसके प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लिपिक द्वारा कथित तौर पर यह कहा जाता है कि बिना मोटी रकम दिए आदेश नहीं कराया जाता,जबकि अन्य मामलों में रकम देने के बाद आदेश जारी होने की बात भी शिकायतकर्ता ने कही है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल सिर्फ एक लिपिक की भूमिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि SDM कार्यालय की निगरानी व्यवस्था और राजस्व प्रकरणों के निपटारे की पूरी कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ सकती है।
भूमि डायवर्सन के लिए ऑनलाइन आवेदन, ई-चालान और दस्तावेज अपलोड करने की व्यवस्था के बावजूद यदि किसी आवेदक को महीनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ें और ऊपर से रिश्वत मांगने के आरोप सामने आएं,तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि फाइल ऑनलाइन हुई है या सिर्फ रिश्वत की प्रक्रिया ऑफलाइन चल रही है?
शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई और अपने डायवर्सन प्रकरण को आगे बढ़ाने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री,राजस्व मंत्री तथा कवर्धा एवं पंडरिया विधानसभा के विधायकों को भी भेजी गई है।
अब असली सवाल प्रशासन के सामने है—क्या 116 दिनों से अटकी इस फाइल की जांच होगी, कथित ₹15 हजार के लेन-देन की सच्चाई सामने आएगी और ₹30 हजार की कथित मांग की निष्पक्ष पड़ताल होगी?
हालांकि,शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच होना बाकी है। संबंधित लिपिक और SDM कार्यालय का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



