छत्तीसगढ़

बीजेपी की सुशासन राज में मस्तूरी में हो रहा जम कर घोटाला सरकारी जमीन रातो रात हो रहा निजी अब गिधपुरी सरपंच बालाराम जांगड़े के नाम कलेक्टर बिलासपुर से शिकायत सो रहें तहसीलदार जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//मस्तूरी और पचपेड़ी तहसील क्षेत्र में जमीन से जुड़े एक से बढ़कर एक नए अजूबे और ताज्जुब कर देने वाले मामले सामने आने लगे हैं जहां पटवारी महज कुछ पैसों के लिए ही सरकारी जमीनों को अपने रिश्तेदारों को बांटते फिर रहे हैं ऐसा ही एक मामला पचपेड़ी तहसील के ग्राम पंचायत गिधपुरी से सामने आया है जहां वर्तमान सरपंच बालाराम जांगडे के नाम बिलासपुर कलेक्टर अवनीश शरण से शिकायत किया गया है कि सरपंच रहते हुए बालाराम जांगड़े ने कई एकड़ जमीन को अवैध रूप से कब्जा कर पटवारी से सांठ गांठ कर पट्टा पर्ची बनवा लिया और इसी पर्ची से सहकारी समिति में लेजाकर धान भी बेच रहा है जिससे शासन को भी चूना लग रहा है शिकायत करता द्वारका पटेल और कौशल पटेल ने लिखित शिकायत में बताया हैँ कि बालाराम जांगडे सरपंच गिधपुरी के द्वारा सरकारी जमीन को अपने भाई भतीजा और बच्चों के नाम चढ़वाया गया है जिस पर बिलासपुर कलेक्टर से निवेदन किया गया है की जांच कर इस पर उचित कार्रवाई किया जाए।

पटवारी और तहसीलदारों की लापरवाही…

क्षेत्र में जमीन से जुड़े कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं जहां सरकारी जमीनों को निजी बना कर रातो रात पट्टा और पर्ची बना दिया जा रहा है और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है हालांकि बिलासपुर कलेक्टर से हुए शिकायत में पटवारी का नाम सामने नहीं आया है लेकिन यह भी जांच का विषय जरूर है ग्रामीण बताते हैं कि पटवारी अब मस्तूरी तहसील में नहीं है वह जिले के किसी अन्य तहसील में अपना ट्रांसफर करा चुका है जिसने इस घोटाला को अंजाम दिया था इसके अलावा भी उस पटवारी ने बहतरा में अपने एक खास व्यक्ति को सरकारी जमीन लगभग 5 एकड़ का पर्ची बनाकर दिया हैँ एक सचिव कों भी 1 एकड़ का पट्टा दिया गया हैँ इसके लिए जल्द ही शिकायत होने वाला है इसके अलावा पचपेड़ी तहसील क्षेत्र के ही केंवटाडीह टांगर से 3.50 एकड़ सरकारी जमीन को किसी के नाम में चढाने का मामला दो-चार दिन पहले ही आया है यह बात समझ से परे है कि पटवारी तो आंख बंद करके काम कर रहे हैं उनको पैसे का लालच हैँ पर कैसे तहसीलदार बिना जांच पड़ताल किए सरकारी जमीन को किसी के नाम में चढाने से पहले चेक नहीं करते क्योंकि अंतिम फैसला तहसीलदारों को ही लेना होता है बीजेपी की सुशासन में दाग लगाते यह अधिकारी आखिर कब तक मस्तूरी क्षेत्र के सरकारी जमीनों को पटवारी की सहयोग से अपने रिश्तेदारों को बाँटते रहेंगे अब देखना दिलचस्प होगा कि इन सभी मामलों में कब तक जांच होती है और कब तक इन भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई शासन प्रशासन करती है।

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