CG – सिस्टम की बेरुखी : मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए 1 साल से उम्मीद की दौड़ जनपद कार्यालय से जिला पंचायत अध्यक्ष तक सिर्फ कोरा आश्वासन जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर
कोरबा//सरकारी योजनाओं के दावों के बीच सिस्टम में लालफीताशाही और लेटलतीफी तो जगजाहिर है, लेकिन अब तो जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि भी कोरा आश्वासन थमाने लगे है। एक तरफ सरकार योजनाओं को हितग्राहियों के हितों के लिए बनाती है, लेकिन अफसोस की जरूरतमंद तक पहुँचने में ही उन्हें सालों लग जाते है और मजबूर दफ्तरों से लेकर नेताओ- जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटते रहते है। कुछ ऐसा ही मामला ग्राम पोड़ी निवासी संतोषी उरांव का सामने आया है। दोनों पैर से दिव्यांग संतोषी एक मोटराइज्ड ट्राई साइकिल पाने के लिए 1 साल से जनपद पंचायत का चक्कर काट रही है। वहीं 3 महीने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष से संपर्क साध फरियाद लगाने पर भी उसे योजना के लाभ की जगह कोरा आश्वासन मिला है।
जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पोड़ी के उरांवपारा में रहने वाली संतोषी उरांव दोनों पैर से पूर्णतः दिव्यांग है। उसे 4 वर्ष पहले एक मोटराइज्ड ट्राई साइकिल योजना के तहत मिला था, लेकिन समय के साथ- साथ ट्राई साइकिल खराब हो चला और वर्तमान वह चलने लायक नही है। संतोषी बताती है कि परिजन की मदद से वह ट्राई साइकिल की मांग को लेकर 1 साल पहले जनपद पंचायत कार्यालय गई थी तब मांगे जाने पर उसने दिव्यांगता प्रमाणपत्र सहित आवश्यक दस्तावेज अधिकारियों को दिए थे। जिसके बाद ट्राई साइकिल पाने वह अनेकों बार जनपद कार्यालय गई पर मोटराइज्ड ट्राई साइकिल नही आना बताकर हर बार उसे वापस भेज दिया जाता रहा। संतोषी के परिचितों ने 3 माह पहले जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह से संपर्क साध फरियाद लगाई, तब उन्होंने आवश्यक दस्तावेज मांगे और आश्वासन दिया कि जल्द ही मोटराइज्ड ट्राई साइकिल मिल जाएगा। जिसके बाद उन्हें अनेकों बार फरियाद लगाया गया पर उनका रटा- रटाया जवाब रहा कि “जल्द मिल जाएगा” इसी आश्वासन पर दिव्यांग संतोषी आस लगाई बैठी है कि आज नही तो कल उसे मोटराइज्ड ट्राई साइकिल जरूर मिलेगा। संतोषी को ट्राई साइकिल नही मिलने से उसे आजीविका और गतिशीलता में भारी परेशानी हो रही है। परिजन उसे पीठ पर उठाकर कहीं लाने ले जाने को मजबूर है। योजना के अनुसार 40% दिव्यांगता पर सामान्य और 80% पर मोटराइज्ड ट्राई साइकिल मिलनी चाहिए, लेकिन नौकरशाही की सुस्ती और जिम्मेदारों के कोरे आश्वासन योजना में बाधक बनी हुई है।




