अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 : सीएम धामी बोले— गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की कालजयी मार्गदर्शिका है,,,,

देहरादून। सीएम पुष्कर सिंह धामी आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि श्रीमद् भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की कालजयी मार्गदर्शिका है। यह एक ऐसा दिव्य प्रकाशपुंज है, जिसमें मनुष्य के आचरण, चिंतन, कर्तव्य, भक्ति, ज्ञान और जीवन व्यवहार का अद्वितीय संकलन है।
भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक
सीएम धामी ने कहा कि गीता हमारे जीवन की सच्ची मार्गदर्शक है, जो हमें सत्य, धर्म और कर्तव्य के पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। हमारी सरकार सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर समर्पण भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में विभिन्न मंदिरों का जीर्णोद्धार, धार्मिक स्थलों का विकास और पवित्र घाटों का सौंदर्यीकरण इसी संकल्प का अभिन्न हिस्सा है। इसके साथ ही प्रदेश के स्कूलों में गीता के श्लोकों के वाचन की शुरुआत भी की गई है।
कुंभ महोत्सव का निमंत्रण दिया
सीएम धामी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि आज कुरुक्षेत्र, हरियाणा में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विराट संत सम्मेलन में पूज्य साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्मिलित होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर पूज्य साधु-संतों को वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाले भव्य कुंभ महोत्सव के लिए निमंत्रण भी दिया। उन्होंने गीता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए स्वामी ज्ञानानंद और हरियाणा सरकार के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन गीता के श्लोकों के पाठ को अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। हमारे गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को आज न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड संपूर्ण भारत के नागरिकों के लिए आस्था, विश्वास और संस्कृति का पवित्र केंद्र है। देवभूमि के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने राज्य में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कठोर कानून लागू किया है। उत्तराखण्ड में एक सख्त दंगारोधी कानून भी बनाया है। 10 हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। देश में सबसे पहले उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की स्थापना की है।



