कोरबी (सी) सरपंच-सचिव लिख रहे भ्रष्ट्राचार की इबारत फर्जी बिल से लगा रहे सरकार को चूना…! कचरा संग्रहण कार्य 15वें वित्त से निकाले 90 हजार स्वच्छग्राही को 20 हजार मानदेय देकर शेष राशि डकारे पढ़े पूरी ख़बर
कोरबा//गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पंचायती राज का गठन किया गया है, ताकि ग्राम सभा व पंचायत बैठक के माध्यम से पंच, सरपंच व सचिव और ग्रामवासी मिलकर ग्रामीण योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने के साथ विकास कार्यों को धरातल पर फलीभूत कर सकें। इसके लिए ग्राम पंचायत को वर्षवार मूलभूत सहित अन्य मद एवं योजना से सरकार द्वारा राशि दी जाती है। जिसे पंचायत के बुनियादी विकास तथा आवश्यकतानुसार निर्माण पर खर्च किया जा सके। लेकिन ग्राम पंचायत कोरबी (सी) में बुनियादी विकास की राशि सरपंच- सचिव के भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ रही है और वे फर्जी बिलों से सरकार व जनता के पैसों पर सेंध लगाने में जुटे हुए है।
पोड़ी उपरोड़ा जनपद के ग्राम पंचायत कोरबी (सी) सरपंच- सचिव द्वारा ग्राम विकास के नाम पर फर्जी बिलों से 15वें वित्त की राशि हजम करने के अलावा सफाई कार्य का स्वच्छग्राही को मानदेय भुगतान करने के नाम पर भी एक बड़ी राशि डकार गए। इस पंचायत में ग्राम की दो महिला समूह क्रमशः कोरबी एवं अचानकपुर की महिलाओं द्वारा पंचायत की ओर से स्वच्छता अभियान के तहत महीनों पूर्व घर- घर जाकर कचरा संग्रहण का कार्य किये है, जिसके मानदेय भुगतान राशि 90 हजार 15वें वित्त मद से पंचायत द्वारा आहरण किया गया, जिसके रिचार्ज बाउचर तिथि 26 सितंबर 2025 है।
किन्तु अचानकपुर की महिला समूह स्वच्छग्राही को मात्र 20 हजार मानदेय राशि भुगतान कर और शेष राशि 70 हजार सरपंच- सचिव खुद हजम कर गए, जबकि कोरबी की महिला समूह आज भी स्वच्छता कार्य के मानदेय राशि पाने सरपंच- सचिव का चक्कर लगा रही है। इस प्रकार सरपंच कीर्ति कुमार उइके व सचिव मेहरून निशा के सुनियोजित मिलीभगत से कचरा संग्रहण कार्य के एवज में सरकारी धन का बंदरबांट कर और स्वच्छता कार्य किए समूह स्वच्छग्राही के हक पर डांका डाला गया। यहां सरपंच- सचिव द्वारा पंचायती राज अधिनियम को परे रखकर अपने नियम चलाए जा रहे है और ग्राम विकास के लिए जो राशि शासन से जारी होती है, वह राशि इनके लिए चारागाह साबित हो रही है। सरपंच- सचिव के सांठगांठ से ग्रामीण जनता के पेयजल व्यवस्था के नाम पर 3.29 लाख व नाली निर्माण के नाम पर 1.11 लाख की राशि बिना काम 15वें वित्त आयोग से आहरण कर वारा- न्यारा किया जा चुका है, साथ ही स्वच्छग्राही मानदेय राशि डकारने में इन्हें जरा भी शर्म नही आयी। इसकी शिकायत महिला समूह ने कलेक्टर से करने की ठानी है।




