CG – शासकीय सेवा में रहकर कोई भी व्यक्ति कानून का उल्लंघन ना कर सके और किसी भी महिला को प्रताड़ित करने का दुस्साहस ना करे…

शासकीय सेवा में रहकर कोई भी व्यक्ति कानून का उल्लंघन ना कर सके और किसी भी महिला को प्रताड़ित करने का दुस्साहस ना करे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्यगण लक्ष्मी वर्मा, श्रीमती सरला कोसरिया, ओजस्वी मण्डावी एवं सुश्री दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 307 वी. सुनवाई हुई। रायपुर जिले में 149 वी. जनसुनवाई।
आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका अनावेदक की सगी बुआ है। अपनी पैतृक संपत्ति में मकान का हक पाने आयोग के समक्ष आयी है। उसनेे बताया कि पैतृक संपत्ति को लगभग साढे ग्यारह एकड़ को 2 करोड़ 40 लाख रू. में अनावेदकगणों द्वारा बेच दिया गया और पूरी राशि खुद रखा है। जिसमें आवेदिका का हिस्सा 24 लाख रू. है। आयोग द्वारा अनावेदक (भतीजे) से पूछताछ करने पर वह आयोग को गुमराह कर रहा था। उसने कहा कि जमीन की पूरी राशि उसके दादा के पास है और उसके दादा मानसिक रूप से अस्वस्थ्य है और आज वह तिल्दा पेशी में गये है। इस प्रकार से अनावेदक द्वारा आयोग को गुमराह करने की कोशिश किया। अनावेदक की बातों से यह स्पष्ट है कि पैतृक संपत्ति की समस्त राशि अनावेदकगणों के पास है और वह आवेदिका को संपत्ति में हिस्सा देने से बचने के लिए मनगढंत बाते कर रहे है। आयोग ने इस पर सभी अनावेदकगणों को अगली सुनवाई में थाना के माध्यम से उपस्थिति के निर्देश दिए, ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।
एक प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ मामला प्रस्तुत किया कि वह दूसरी महिला के साथ भागने व आवेदिका को तलाक के लिए दबाव बना रहा है। अनावेदक ने बताया कि उसका एकतरफा तलाक कुंटुंब न्यायालय से हो चुका है। आवेदिका लगभग 3 वर्षो से अनावेदक से अलग रह रही है और उसे किसी भी प्रकार का कोई भरण- पोषण प्राप्त नही हो रहा है। अनावेदक ने पिछली सुनवाई में यह स्वीकारा था कि वह 3 लाख रू. एकमुश्त भरण-पोषण देगा आवेदिका को देगा, लेकिन 3 माह तक अनावेदक गायब रहा उसने न्यायालय में गलत बयानों के आधार पर एक तरफा तलाक लिया। आयोग की समझाईश पर अनावेदक 3 लाख रू. एकमुश्त भरण-पोषण की राशि आवेदिका को देने के लिए तैयार हुआ। वह कल दिनांक को 1 लाख रू. नगद व 2 लाख रू. का चेक लेकर आयोग के समक्ष उपस्थित होगा। इस आधार पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा। अनावेदक को अपने विस्तृत प्रस्ताव के साथ ईमानदारी से उपस्थित होने को कहा गया अन्यथा आयोग के द्वारा अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा की जायेगी।
पिछली सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आयोग के समक्ष अनावेदक ने यह स्वीकार किया था कि उसने तलाक लिए बगैर दूसरी महिला से विवाह कर लिया है। और दोनो शासकीय सेवा में कार्यरत् है। अनावेदकगण जानबूझ कर सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन कर रहे है। अतः दोनो अनावेदकगणों को शासकीय सेवा से बर्खास्त किये जाने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है। अनावेदक ने आवेदिका से वैधानिक तलाक लिये बिना दूसरा विवाह किया है आयोग की प्रक्रिया के तहत सुनवाई के बाद पुष्टि हो जाती है। इस स्तर पर आयोग द्वारा प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग व मुख्य सचिव छ.ग. शासन को पत्र प्रेषित कर दोनो अनावेदकगणों को शासकीय सेवा से बर्खास्त किये जाने की अनुशंसा की जायेगी।
एक प्रकरण में अनावेदकगणों ने बताया कि आवेदिका का पूर्व में विवाह हो चुका है और वह अपने पूर्व पति से तलाक भी ले चुकी है। आवेदिका ने अपने पूर्व शादी की बात छिपाकर दूसरे जगह विवाह तय कर लिया। इस बात का पता चलने पर अनावेदक ने रिश्ता तोड़ दिया और विवाह नहीं हुआ। आवेदिका द्वारा अनावेदकगणों को प्रायोजित तरीके से षड्यंत्र कर फंसाने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है। साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट है कि आवेदिका शादी करके पुलिस थाना और कोर्ट का मिसयूज कर अनावेदकगणों को परेशान कर रही है। इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।