Padma Shri Award 2026 : छत्तीसगढ़ के ये 3 हस्तियां पद्मश्री से सम्मानित, जानिए कौन है बुधरी ताती जिन्हें लोग कहते हैं बड़ी दीदी…..

रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा हर साल कला, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वालों को पद्मश्री पुरुस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस बार देश के 131 हस्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया जा रहा है। 113 पद्म श्री पुरस्कार है। जिसमे छत्तीसगढ़ के तीन लोग शामिल है। ये तीनों बस्तर अंचल के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से सेवा कार्य कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा। डॉ. गोडबोले दंपत्ति को यह सम्मान संयुक्त रूप से प्रदान किया जाएगा। रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में दशकों से निस्वार्थ कार्य कर रहे हैं।
वहीं बुधरी ताती को भी यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती को सम्मानित किया जा रहा है। बुधरी ताती ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति जैसे क्षेत्रों में कई सालों तक काम किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने दी बधाई
छत्तीसगढ़ की तीन लोगों पद्मश्री अवार्ड मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम क्षण बस्तर की समाजसेविका, स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी’ के नाम से विख्यात बुधरी ताटी जी तथा जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले का पद्म सम्मान के लिए चयनित होना पूरे प्रदेश के लिए अपार गौरव और सम्मान का विषय है। प्रदेश और देश का नाम रोशन करने वाले इन तीनों विभूतियों को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएँ।
दंतेवाड़ा जिले के बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ की नाम जाने जानी वाली बुधरी ताती हीरानार ग्राम की रहने वाली है। बुधरी ताती महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान एवं समाजसेवा के लिए पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा। वर्ष 1984 से वे निरंतर वनांचल क्षेत्रों में नशामुक्ति, साक्षरता अभियान, सामाजिक जागरूकता तथा महिलाओं एवं बालिका शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। बुधरी ताती अभी तक 500 से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। बुधरी ताती को छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा वृद्धजनों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। उनके समर्पण और स्नेहभाव के कारण स्थानीय लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘बड़ी दीदी’ कहकर संबोधित करते हैं।
चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा. आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. गोडबोले और उनकी पत्नी पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर एवं अबूझमाड़ जैसे अत्यंत दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहे हैं।
स्वास्थ्य जागरूकता, कुपोषण उन्मूलन और प्राथमिक उपचार को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से दोनों ने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से ऐसे गांवों तक इलाज पहुंचाया है, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। वे स्वयं पैदल अथवा सीमित साधनों के सहारे इन क्षेत्रों में पहुंचकर नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते हैं और मरीजों का उपचार करते हैं।



