जो भगवान से प्रेम, खुदा से मुहब्बत करने लग जाएगा वह दुश्मन किसी का नहीं रह जाएगा – बाबा उमाकान्त महाराज

जो भगवान से प्रेम, खुदा से मुहब्बत करने लग जाएगा वह दुश्मन किसी का नहीं रह जाएगा – बाबा उमाकान्त महाराज
सच्चे सन्त एक फलदार वृक्ष की तरह होते हैं जिसका फल कोई भी खा सकता है, उनके यहाँ कोई भेदभाव नहीं होता है
उज्जैन। परम सन्त बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि हमारे यहां तो मानव धर्म है, सब एक जैसे हैं। देखो इसमें (संगत के लोग) हर जाति मजहब के लोग बैठे हुए आपको मिलेंगे, कोई किसी से नहीं पूछता है। सब बैठते हैं, भोजन प्रसाद खाते हैं, बस यही पूछते हैं कि नाम क्या है आपका, जाति कोई नहीं पूछता। हमारे यहाँ तो सब एक है। जो साधना करते हैं कहते हैं “जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई” जो उस परमात्मा का भजन (साधना) करता है वह हर किसी का होता है। यहाँ भजन सिखाया जाता है और उसको लोग करते हैं। यहाँ किसी की जाति, धर्म, मजहब नहीं छुड़ाया जाता है। भगवान ने कोई जाति नहीं बनाया, उसने तो इंसान बनाया; मानव जाति बनाया, उसने तो केवल मानव धर्म बनाया। सब की हड्डी एक जैसी, सब का खून एक जैसा, सब का माँस एक जैसा, आँख-कान-नाक-मुँह सब के एक जैसा ही बनाया, तो उसने भेदभाव कहाँ किया? यह तो भेदभाव आपने कर लिया।
सन्तों के पास सब तरह के लोग आते हैं और सब को फायदा होता है
गुरु महाराज (बाबा जयगुरुदेव महाराज) के पास बहुत से लोग आए; हर जाति के, हर मजहब के मानने वाले, जिनको आप छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, पढे-अनपढ़ कहते हो सब आए। अधिकारी, कर्मचारी, नेता, किसान, व्यापारी और जिनको आप अनपढ़ कहते हो, सब तरह के लोग आते थे , गुरु महाराज के पास और सबको फायदा होता था। क्योंकि फकीरों को दरिया कहा गया है, उनको फलता हुआ वृक्ष कहा गया है। कोई भी फल खाए, उनके लिए कोई भेदभाव नहीं होता है। जिनको जानकारी नहीं होती है वही भेदभाव करते हैं, वही जाति वाद, वही भाई वाद, वही भतीजा वाद चलाते हैं, वही कौम वाद चलाते हैं। लेकिन जिनको जानकारी हो जाती है, वह सारे वाद को खत्म कर के मानव वाद चलाते हैं। फकीर इंसानियत ला देते हैं।
आप अच्छा समाज बनाओ, मानव वाद लाओ और लोगों को ईश्वरवादी बनाओ
आप देश प्रेम बनाए रखना। देश की संपत्ति, आपकी अपनी संपत्ति है; तोड़फोड़, आंदोलन, हड़ताल, धरना, घेराव से कोई काम होने वाला नहीं है, आगजनी, लूटपाट, हिंसा-हत्या से कोई काम होने वाला नहीं है, इसलिए इससे दूर रहना। चाहे कोई राजनेता हो, चाहे कोई पंडित-मुल्ला-पुजारी हो, चाहे कोई धार्मिक ग्रंथ हो, कोई मजहबी किताब हो, किसी की निंदा (बुराई) मत करना। किसी भी जाति या धर्म की निंदा मत करो। भाई-भतीजा वाद, कौम वाद, एरिया वाद, भाषा वाद के चक्कर में मत पड़ो। आप अच्छा समाज बनाओ, मानव वाद लाओ, लोगों को ईश्वरवादी, खुदा परस्त बनाओ। जो ईश्वर से प्रेम करने लगेगा, खुदा से मुहब्बत करने लगेगा वह सबका दोस्त हो जाएगा, दुश्मन किसी का नहीं रह जाएगा।