जब शिक्षकों ने ठाना बदलाव, तो सरकारी स्कूल बने बच्चों की पहली पसंद, 23 बच्चे पहुंचे नवोदय-एकलव्य, 150 स्कूलों तक पहुंची डिजिटल शिक्षा…

नवाचार, जनभागीदारी और समर्पण की मिसाल बने धमतरी के शिक्षक, राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित
छत्तीसगढ़ धमतरी… सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। साफ नीयत, नई सोच और बच्चों के भविष्य के प्रति समर्पण से भी शिक्षा की दिशा बदली जा सकती है। धमतरी जिले के शिक्षकों ने अपने नवाचारों और प्रयासों से इसे साबित कर दिखाया है।
शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू, शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू और शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है। इनके प्रयासों से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ ही विद्यार्थियों को आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिली हैं।
इनमें से लीलाराम साहू और रंजीता साहू का चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है। वहीं प्रीति शांडिल्य ने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री तैयार करने के एक ऐसे अभियान में योगदान दिया, जिसका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है।
खेल-खेल में पढ़ाई, 23 बच्चों ने नवोदय और एकलव्य में बनाई जगह
शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू ने बच्चों के लिए पढ़ाई को रोचक और सहज बनाने पर विशेष ध्यान दिया। खेल-खेल में शिक्षा और टीएलएम आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से उन्होंने बच्चों में सीखने की रुचि विकसित की।
उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालयों में हो चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके नवाचारों को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली है और अब उनका चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।
‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान से 150 स्कूलों तक पहुंची डिजिटल शिक्षा
शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू ने संसाधनों की कमी को चुनौती के बजाय अवसर बनाया। उन्होंने ‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान शुरू कर शिक्षकों और पालकों की सहभागिता से जिले के करीब 150 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने की पहल की।
इसके अलावा उन्होंने लगभग 300 विद्यालयों तक गणित वर्णमाला पहुंचाने और करीब 11 हजार बच्चों को पेन, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में बच्चों को डिजिटल माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
शिक्षा में तकनीक और जनभागीदारी के अभिनव प्रयोग के लिए उनका भी चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।
दृष्टिबाधित बच्चों के लिए तैयार हुईं 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स
शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में राज्य के 30 शिक्षकों की टीम के साथ उन्होंने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल एवं ऑडियो आधारित शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में सहयोग किया।
इस पहल के तहत कक्षा 5वीं से 12वीं तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार की गईं। इन पुस्तकों को 400 से अधिक स्कूलों और 20 दृष्टिबाधित विशेष विद्यालयों तक पहुंचाया गया है।
इस उल्लेखनीय पहल को लाखों बार देखा और सुना जा चुका है तथा इस कार्य का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
कलेक्टर ने किया सम्मानित
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इन शिक्षकों की उपलब्धियों को धमतरी जिले के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शिक्षक लीलाराम साहू और शिक्षिका रंजीता साहू को शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
कलेक्टर ने दोनों शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा में बदलाव केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दृष्टिकोण, समर्पण और नवाचार से आता है।
उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों को बच्चों और पालकों की पहली पसंद बनाने के लिए इस प्रकार के सकारात्मक प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। धमतरी के शिक्षकों की उपलब्धियां न केवल जिले के लिए गर्व का विषय हैं, बल्कि अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।
एक शिक्षक की पहल, हजारों बच्चों के सपनों को मिली नई उड़ान
धमतरी के इन शिक्षकों की कहानी केवल पुरस्कार और सम्मान तक सीमित नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जो तब संभव होता है जब शिक्षक अपने दायित्व को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन मानकर काम करता है।
नवोदय और एकलव्य विद्यालयों तक पहुंचते बच्चे, डिजिटल शिक्षा से जुड़ते सैकड़ों स्कूल और दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक पहुंचती हजारों ऑडियो पुस्तकें—धमतरी के शिक्षकों की इन पहलों ने सरकारी शिक्षा की नई और सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत की है।