छत्तीसगढ़

CG – अमलडीहा में करोड़ों के एनीकट निर्माण में बड़ा ‘खेल सीमेंट-कंक्रीट की जगह पत्थर भरकर बन रहा एनीकट, शिवनाथ से अवैध रेत निकाल सरकार को लाखों राजस्व का चूना खनिज अधिकारी मेहरबान पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के मस्तूरी विधानसभा के ग्राम अमलडीहा में शिवनाथ नदी पर बन रहे करोड़ों के एनीकट निर्माण में भारी अनियमितता का आरोप लगा है। ठेकेदार पर गुणवत्ताहीन निर्माण और शिवनाथ से अवैध रेत निकालकर सरकार को लाखों के राजस्व का चूना लगाने का आरोप है। शिकायतों के बाद भी बिलासपुर में बैठे जिम्मेदार अधिकारी और खनिज विभाग नतमस्तक बने हुए हैं।

क्या है पूरा मामला…

1.करोड़ों की लागत जल संसाधन विभाग द्वारा अमलडीहा में शिवनाथ नदी पर सिंचाई के लिए करीब 8 करोड़ की लागत से एनीकट सह स्टॉप डैम बनाया जा रहा है।

2.मानक ताक पर नियमत एनीकट का निर्माण सीमेंट, गिट्टी, रेत के तय अनुपात के कंक्रीट से होना चाहिए। आरोप है कि ठेकेदार कंक्रीट की जगह बड़े-बड़े पत्थर डालकर ऊपर से नाममात्र का मसाला डाल रहा है। “एक बरसात भी नहीं टिकेगा”ग्रामीणों ने आशंका जताई।

3.रेत का ‘काला खेल एनीकट के लिए शिवनाथ नदी से ही अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। बिना रॉयल्टी पर्ची सैकड़ों हाईवा रेत का उपयोग हो रहा है। इससे शासन को प्रति हाईवा ₹1500 का नुकसान हो रहा है। अनुमान है कि अब तक लाखों की रॉयल्टी चोरी हो चुकी।

4.अधिकारी मौन ग्रामीणों ने SDO, EE जल संसाधन और खनिज विभाग को कई बार यहाँ के जनप्रतिनिधि अवगत करा चुके हैँ लेकिन मौके पर न जांच हुई, न सैंपल लिए गए। “बिलासपुर में बैठे अफसर सब जानते हुए भी चुप हैं। मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों में आक्रोश…

अमलडीहा और आसपास के गाँव के किसानों का कहना है कि एनीकट सिंचाई के लिए जीवनरेखा है। गुणवत्ताहीन निर्माण से हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई खतरे में पड़ जाएगी। “करोड़ों डूब जाएंगे और दोषी ठेकेदार-अफसर मलाई खाएंगे”

तकनीकी खामी क्या है…

एनीकट निर्माण में M-25 ग्रेड कंक्रीट अनिवार्य है। इसमें 1:1:2 का अनुपात यानी 1 भाग सीमेंट, 1 भाग रेत, 2 भाग गिट्टी होती है। पत्थर भरने से स्ट्रक्चर कमजोर होता है। पानी के तेज बहाव में एनीकट बहने का खतरा रहता है। पिछले साल मुंगेली में इसी तरह बना एनीकट पहली बारिश में बह गया था।

ग्रामीणों की मांग…

1.थर्ड पार्टी से गुणवत्ता जांच हो और रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
2.अवैध रेत के उपयोग पर ठेकेदार से रॉयल्टी + जुर्माना वसूला जाए।
3.निर्माण की वीडियोग्राफी कराई जाए।
4.दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर FIR हो।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो वे एनीकट स्थल पर धरना देंगे और निर्माण रुकवाएंगे।

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