CG – वर्षों का इंतजार खत्म खपरी (ओं) से बिल्हा कों जोड़ने वाली जर्जर सड़क का निर्माण सरपंच गिरिज गोंड की पहल से ग्रामीणों में खुशी की लहर पढ़े पूरी ख़बर
बिलासपुर//मस्तूरी विधानसभा के ग्राम पंचायत खपरी (ओं) के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई। खपरी (ओं) को बिल्हा से जोड़ने वाली मुख्य सड़क, जो हमेशा गड्ढों और कीचड़ से भरी रहती थी, अब सरपंच गिरिज गोंड की अगुवाई में बनाई जा चूकि है। सड़क निर्माण शुरू होते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
क्यों अहम है यह सड़क?…
1.बिल्हा से नजदीकी खपरी (ओं) समेत आसपास के दर्जनभर गांव मस्तूरी विधानसभा में आते हैं, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ग्रामीण बिल्हा बाजार पर निर्भर हैं। सब्जी, राशन, दवा, कपड़ा – सब बिल्हा से ही खरीदते हैं क्योंकि मस्तूरी की तुलना में बिल्हा मार्केट काफी नजदीक पड़ता है।
2.नरक जैसी थी हालत 3 किमी की यह कच्ची सड़क बारिश में दलदल बन जाती थी। स्कूली बच्चों, मरीजों और बाइक सवारों का निकलना मुश्किल था। गर्भवती महिलाओं को बिल्हा ले जाना पड़ता था। और रोड़ की समस्या की वजह से प्रसव पीड़ा वाली महिलाओं कों लाने ले जाने में बड़ी समस्या होती थी कई बार कीचड़ में फंसकर ट्रैक्टर भी पलट चुके हैं।
3.सरपंच की पहल सरपंच गिरिज गोंड ने बताया, “ग्रामीणों की ये सबसे बड़ी समस्या थी। जिसे सबकी सहायता से दूर किया गया हैँ ज़ब से गिरिज सरपंच बना था तब से वो इस रोड़ कों किसी तरह से बनवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहें थे आखिरकार इसमें उनको सफलता मिली और गाँव वालों की मुस्कान भी लौटी।
ग्रामीणों में जश्न का माहौल…
सड़क पर काम शुरू होते ही खपरी ग्रामीणों नें ख़ुशी जाहिर की और कहा “20 साल से नेता वादा करके जाते थे पर चुनाव जीत कर भूल जाते थे।
सरपंच गिरिज गोंड ने करके दिखा दिया”…
गाँव के बड़े बुजुर्ग ने कहा कि अब बिल्हा बाजार जाना आसान होगा, बरसात में भी बच्चे बिना किचड़ में चलें साफ कपड़े के साथ स्कूल जा पाएंगे चूकि मस्तूरी मुख्यालय यहाँ से बहुत दूर हैँ जिसके कारण गाँव वालों कों बिल्हा के मार्केट में खरीदी करनी पडती हैँ पर रोड़ पूरी तरह से छति ग्रस्त हो चूका था इसलिए नदी के पुल तक पहुंच पाना हीं मुश्किल होता था अब हम गाँव वालों कें लिए डगर आसान हुआ हैँ।
आर्थिक फायदा भी…
सड़क बनने से खपरी क्षेत्र के किसान अपनी सब्जी-धान सीधे बिल्हा मंडी ले जा पाएंगे। अभी टूटी सड़क के कारण व्यापारी गांव नहीं आते और औने-पौने दाम देते हैं। मरीजों को भी बिल्हा अस्पताल पहुंचने में 15 मिनट की जगह 1 घंटा लग जाता था।



