CG – बुड़बुड़ : 30.85 लाख से प्राथमिक-माध्यमिक शाला भवन के घटिया निर्माण के खबर से तिलमिलाए जनप्रतिनिधि गुणवत्ता पर सवाल उठा तो बच्चों से लिया बदला सरपंच-सचिव ने स्कूल का बिजली कनेक्शन काटा पढ़े पूरी ख़बर
0 उप सरपंच ने फोन पर पूछा- किस आधार पर लगाए खबर?, दरार- सीपेज की बात पर चुप्पी साध ली.
0 ब्लास्टिंग से गिरा गुणवत्ताहीन भवन तो कौन होगा जिम्मेदार?, सवाल पर निरुत्तर हुए पंचायत प्रतिनिधि.
कोरबा//चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए ग्राम पंचायत बुड़बुड़ के सरपंच- सचिव और उपसरपंच ने 30.85 लाख के स्कूल भवनों में भ्रष्ट्राचार उजागर होने पर बच्चों से ही बदला ले लिया। खबर प्रसारित होते ही तिलमिलाए सरपंच- सचिव स्कूल पहुँचे और समस्या सुधारने के बजाय 300 मीटर दूर खंभे से खींचे गए वैकल्पिक विजली तार को ही काट दिया। नतीजा उमस भरी गर्मी में मासूम बच्चे पसीना से तरबतर होकर पढ़ने को मजबूर है।
सवाल पूछा तो उपसरपंच की बोलती बंद…
खबर के बाद ग्राम के उपसरपंच तिरिथ राम केशव ने फोन कर खबर के आधार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा- किस आधार पर खबर लगाए हो? क्या गड़बड़ हुआ है बताओ?, जब उन्हें बताया गया कि डीएमएफ मद से बने प्राथमिक- माध्यमिक शाला भवनों में घटिया सामाग्री से पहली हल्की बारिश में ही छत से सीपेज शुरू हो गया है और समीप संचालित एसईसीएल खदान में ब्लास्टिंग के कारण नवीन भवन के पहले सत्र में ही दीवारों पर दरारें आ गई है, तो वे निरुत्तर हो गए। जब यह पूछा गया कि घटिया निर्माण वाले इस स्कूल में ब्लास्टिंग से यदि कोई हादसा हो गया और बच्चों की जान को खतरा हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? तो उपसरपंच ने चुप्पी साध ली। उनके पास कोई जवाब नही था।
सबसे बड़ा सवाल: अपने ही बच्चों से दुश्मनी क्यों?
यहां पर।चिंताजनक पहलू यह है कि सरपंच- उपसरपंच गांव के मुखिया होते है। गांव का पहला स्कूल, पहला अस्पताल, पहली सड़क उनकी जिम्मेदारी होती है। फिर उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता से समझौता क्यों किया? इस घटिया भवनों में उन्ही के गांव के, उनके रिश्तेदारों के, उनके परिचितों के बच्चे पढ़ने जाएंगे। क्या कमीशन के चक्कर मे उन्होंने अपने ही गांव के भविष्य और जान को दांव पर लगा दिया? जब मुखिया ही बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करे, तो गांव का क्या होगा?
बदले की कार्रवाई, बच्चों पर भारी…
खबर प्रसारित होने के बाद सुधार कार्य कराने, बिजली कनेक्शन को स्थायी और सुरक्षित करने, दरारों की मरम्मत कराने, सीपेज ठीक कराने के बजाय सरपंच- सचिव ने तार काटकर बच्चों को सजा दी है। 300 मीटर दूर से पेड़ों के सहारे खींचा गया तार पहले ही खतरनाक था, आंधी में तार टूटने से हादसे का डर था। नियमतः उस3 अंडरग्राउंड या मानक पोल से स्थायी करना था, लेकिन उन्होंने समाधान के बजाय कनेक्शन ही काट दिया। अब पंखे बंद है, बच्चे गर्मी- उमस से बेहाल हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, ये कैसा न्याय?…
गांव के लोगों का कहना है कि खबर प्रसारित करने वाले पत्रकार से नाराजगी थी तो हमसे लड़ लेते, बच्चों का क्या कसूर? कमीशन खाकर घटिया स्कूल बनाया, अब सवाल पूछने पर बिजली काट दी। क्या यही पंचायती राज है? बहरहाल जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो न्याय की उम्मीद किस्से करें? बुड़बुड़ के बच्चे आज यह सवाल हर जिम्मेदार से पूछने की कोशिश कर रहे है।




