CG High Court ब्रेकिंग : अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, TET और B.Ed. पास होने पर भी मनपसंद पद नियुक्ति का नहीं कर सकते दावा……

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, उम्मीदवार के पास उच्च शैक्षणिक योग्यता होने मात्र से वह अनुकंपा नियुक्ति के तहत अपनी पसंद के या किसी उच्च पद (जैसे वर्ग-3) पर दावा नहीं कर सकता। अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को तत्काल वित्तीय संकट से उबारना है, न कि योग्यता के आधार पर नियमित रोजगार प्रदान करना। सक्ती जिले की एक महिला की याचिका को खारिज करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उसे चपरासी (वर्ग-4) के पद पर दिए गए नियुक्ति आदेश को पूरी तरह सही ठहराया है।
जाने पूरा मामला
याचिकाकर्ता मीनाक्षी चंद्रा के पति हीरा राम चंद्रा शासकीय प्राथमिक शाला लहंगा (सक्ती) में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत थे। 29 नवंबर 2025 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद मीनाक्षी चंद्रा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। सक्ती जिला शिक्षा अधिकारी DEO कार्यालय ने 18 मार्च 2026 को याचिकाकर्ता के पक्ष में अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी किया, लेकिन उन्हें चपरासी (वर्ग-4) का पद आवंटित किया।
अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में डीईओ के आदेश को चुनौती देते हुए मीनाक्षी चंद्रा ने अपने अधिवक्ता विनोद कुमार देवांगन के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता
विनोद कुमार देवांगन ने कहा, याचिकाकर्ता उच्च शिक्षित है। उनके पास B.Ed.की डिग्री है और उन्होंने छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (CG-TET) भी पास कर रखी है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि उनकी इस उच्च योग्यता को देखते हुए उन्हें चपरासी Class-IV के बजाय शिक्षक Class-III के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से उपस्थित डिप्टी गर्वनमेंट एडवोकेट अनुजा शर्मा ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने सरकार की 15 अप्रैल 2024 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया, सरकारी नीति के अनुसार, वर्ग-3 के कुल पदों में से केवल 25% पद ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आरक्षित रखे जाते है। विभाग ने महिला की योग्यता का सम्मान किया, लेकिन संबंधित संभाग में वर्ग-3 (शिक्षक) के तहत अनुकंपा कोटे का कोई भी पद खाली नहीं था। परिवार को तत्काल राहत देने के लिए उपलब्ध रिक्ति के आधार पर ही नियमानुसार उन्हें चपरासी का पद ऑफर किया गया, जो कि नीति के तहत पूरी तरह सही है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ता को राज्य सरकार की तय नीति के तहत पहले ही अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जा चुका है। केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता के पास वर्ग-3 (शिक्षक) पद के लिए आवश्यक योग्यता है, उन्हें उस पद पर दावा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। डीईओ के 18 मार्च 2026 के आदेश में स्पष्ट लिखा था कि शिक्षक पद के कोटे में वैकेंसी नहीं है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।



