CG – मस्तूरी के जयरामनगर अस्पताल में लापरवाही: 10 बजे पहुंचे बीमार किसान और 2 मासूम पर्ची नहीं कटी तो 1 घंटे तक तड़पते रहे BMO की फटकार के बाद मिला इलाज पढ़े पूरी ख़बर
मस्तूरी//के जयरामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां पर्ची काटने में हुई लेटलतीफी के कारण एक बीमार किसान और 2 छोटे-छोटे बच्चों को 1 घंटे तक दर्द में तड़पना पड़ा। मामला तब सुधरा जब BMO डॉ. अनिल सिंह ने फोन पर फटकार लगाई।
क्या हुआ था पूरा मामला?
10 बजे पहुंचे, 11 बजे मिला इलाज परसदा गांव के किसान निवासी पिंटू सूर्यवंशी अपने 1 साल 3 महीने की बेटी अनाया और 2 साल 6 महीने के बेटे अहान को लेकर सुबह 10 बजे जयरामनगर अस्पताल पहुंचे। बच्चों को तेज पेट दर्द था। बच्चों को भी बुखार और उल्टी की शिकायत थी। दादी सुक्रिता किसी तरह दोनों बच्चों को संभाल रही थीं।
पर्ची के लिए 1 घंटे का इंतजार आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद थे, लेकिन पर्ची काटने वाला कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं था। 10 बजे से 11 बजे तक पर्ची नहीं कटी। इस दौरान बच्चे पेट दर्द से बिलबिलाता रहा और दोनों मासूम रोते रहे।
BMO के हस्तक्षेप के बाद इलाज परेशान होकर परिजनों ने BMO मस्तूरी डॉ. अनिल सिंह को कॉल किया। BMO ने तुरंत अस्पताल स्टाफ को फटकार लगाई। इसके बाद आनन-फानन में पर्ची कटी और तीनों का इलाज शुरू हुआ।
पीड़ित पिता का आरोप…
पिंटू सूर्यवंशी ने कहा, “डॉक्टर साहब हॉस्पिटल में ही बैठे थे। हमने 10 बजे से गुहार लगाई लेकिन पर्ची वाला आया ही नहीं। मेरी बच्ची 1 साल की है, वो भी दर्द से रो रही थी। अगर BMO सर फोन नहीं करते तो पता नहीं कब इलाज मिलता।”
BMO का बयान…
BMO डॉ. अनिल सिंह ने कहा, “मामला संज्ञान में आते ही मैंने स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई है। मरीज की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। लापरवाह कर्मचारी के खिलाफ जांच कर निलंबन तक की कार्रवाई की जाएगी। मैंने खुद फोन कर बच्चों की तबियत पूछी है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा…
जयरामनगर और आसपास के 15 गांवों के लोग इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है “यहां रोज पर्ची, दवाई और डॉक्टर के लिए मारामारी होती है। गरीब की कोई सुनवाई नहीं। कब सुधरेगा स्वास्थ्य विभाग?”
सवाल…
1. डॉक्टर मौजूद होने के बाद भी पर्ची के बिना इलाज क्यों नहीं?
2. इमरजेंसी में OPD की बाध्यता क्यों?
3. स्टाफ की ड्यूटी और समय पर उपस्थिति कौन देखेगा?




