CG ब्रेकिंग : 4 पूर्व सरपंचों के खिलाफ वारंट जारी, इस वजह से एसडीएम की बड़ी कार्रवाई, मचा हड़कंप……

आरंग। छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था के तहत विकास कार्यों के नाम पर शासकीय धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। रायपुर जिले के आरंग अनुविभाग में वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि डकारने के मामले में एक साथ 4 पूर्व सरपंचों के खिलाफ गिरफ्तारी और सिविल जेल (नागरिक कारागार) भेजने का वारंट जारी किया गया है।
न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी आरंग अभिलाषा पैकरा द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 की उपधारा (2) के तहत यह सख्त आदेश जारी किया गया है। कुल मिलाकर इन पूर्व जनप्रतिनिधियों से 43 लाख 77 हजार 277 रुपये की लोक राशि की वसूली की जानी है, जिसे जमा न करने पर इन्हें अधिकतम 30 दिनों के लिए केंद्रीय जेल रायपुर भेजने का निर्देश दिया गया है।
इन 4 पूर्व सरपंचों के खिलाफ जारी हुआ वारंट (वसूली सूची)
न्यायालय द्वारा जारी आदेश और पुलिस थानों को सुपुर्द किए गए वारंट के अनुसार, इन पूर्व सरपंचों पर गाज गिरी है:
राजकुमारी साहू,पूर्व सरपंच नगपुरा – वसूली राशि 4.09 लाख रुपये
गोपाल चतुर्वेदी,पूर्व सरपंच नकटा – वसूली राशि 18,23,880 रुपये
रोशन मिश्रा,पूर्व सरपंच देवदा – वसूली राशि 18,84,773 और 50,300 रुपये
चितरेखा साहू,पूर्व सरपंच राखी – वसूली राशि 209324 रुपये
कारण बताओ नोटिस का नहीं दिया संतोषजनक जवाब
राजस्व न्यायालय के समक्ष प्रचलित विभिन्न राजस्व प्रकरणों में इन सभी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत शासकीय/लोक राशि की वसूली का आदेश काफी पहले ही पारित किया जा चुका था। विहित प्राधिकारी एवं एसडीएम आरंग अभिलाषा पैकरा द्वारा इन सभी अनावेदकों को अपना पक्ष रखने और सिविल जेल न भेजे जाने के संबंध में ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर पर्याप्त अवसर दिया गया था।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी पूर्व सरपंच द्वारा कोई वैधानिक या संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही गबन की गई राशि सरकारी खजाने में लौटाई गई।
जेल अधीक्षक और थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश
एसडीएम एवं अनुविभागीय दण्डाधिकारी आरंग अभिलाषा पैकरा द्वारा आरंग,राखी और मन्दिरहसौद थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल इन संबंधित पूर्व सरपंचों को अपनी अभिरक्षा (Custody) में लें और उन्हें केंद्रीय जेल रायपुर सुपुर्द करें।
जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल रायपुर को जारी संस्थान आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इन्हें अधिकतम 30 दिनों की अवधि के लिए या जब तक ये पूरी बकाया राशि नकद जमा नहीं कर देते (जो भी पहले हो), तब तक सिविल जेल में निरूद्ध रखा जाए। यदि जेल की अवधि के दौरान इनके द्वारा संपूर्ण राशि न्यायालय या जेल अधीक्षक के समक्ष नकद जमा कर दी जाती है, तो इन्हें तत्काल रिहा करने की पात्रता होगी।


