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CG – बहंतरा में सियासी घमासान एक साथ पंचोँ कों हटाने का किसके पास हैं पावर? औऱ क्या बोले नवनियुक्त मस्तूरी एसडीएम इस पुरे मामले में जानें पढ़े पूरी ख़बर

मस्तूरी//ग्राम पंचायत बहंतरा में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद अब नया बवाल खड़ा हो गया है। सोमवार 5 अक्टूबर को बहंतरा के सैकड़ों ग्रामीणों ने मस्तूरी पहुंचकर नवनियुक्त SDM बजरंग वर्मा के नाम वार्ड 1 से वार्ड 15 तक के सभी पंचों को हटाने की मांग को लेकर अलग-अलग लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। ग्रामीणों की मांग है कि या तो उन्हें पुराना सरपंच वापस दिया जाए या पूरी पंचायत का पुनः चुनाव कराया जाए।

क्या है पूरा मामला?

बताते चलें कि बहंतरा में 21 सितंबर को सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई थी। जिसमें निर्वाचित सरपंच सुरेखा राकेश पटेल बहुमत साबित करने में असफल रहीं। 14/2 के बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया और सरपंच स्वतः ही अपने पद से हट गईं।

सरपंच के हटते ही उनके समर्थकों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड पंचों ने मिलीभगत कर साजिश के तहत सरपंच को हटाया है, जिससे गांव का विकास कार्य ठप हो गया है।

नए SDM ने क्या कहा?

इस पूरे मामले में नवनियुक्त मस्तूरी SDM बजरंग वर्मा ने नयाभारत लाइव को बताया कि”ग्रामीणों की शिकायत मिली है। लेकिन दोबारा चुनाव यानी मध्यावधि चुनाव किसी भी पंचायत में ढाई साल पूरे होने के बाद ही संभव है।” उन्होंने शिकायत को नियमानुसार जांच के लिए आगे भेजने की बात कही।

सभी पंचों को हटाने पर क्या कहता है पंचायती राज अधिनियम?

1. पंच के खिलाफ अविश्वास नहीं ला सकते: पंचायती राज अधिनियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) सिर्फ सरपंच और उपसरपंच के खिलाफ ही लाया जा सकता है। वार्ड पंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान नहीं है। इसीलिए बहंतरा में पंच सरपंच को तो गिरा सकते हैं, पर ग्रामीण सीधे पंचों को अविश्वास से नहीं हटा सकते।

2. पंच को हटाने का नियम – धारा 40: किसी पंच को हटाने का अधिकार सिर्फ कलेक्टर को है और वो भी धारा 40 के तहत – यदि वह पद का दुरुपयोग करे, लगातार 3 बैठकों से गैरहाजिर रहे, आपराधिक मामले में सजा हो या भ्रष्टाचार/अतिक्रमण का दोषी हो। इसके लिए ठोस सबूतों के साथ कलेक्टर के पास शिकायत करनी होगी।

3. पूरी पंचायत भंग करना – धारा 36 अगर पूरी पंचायत ही अपने कर्तव्यों का पालन न कर रही हो, तो ग्रामीणों की मांग पर राज्य सरकार धारा 36 के तहत पूरी पंचायत को भंग कर सकती है। लेकिन ये अधिकार गांव वालों का नहीं, सरकार का है।

अब आगे क्या?

कानूनी तौर पर SDM सीधे सभी 15 पंचों को नहीं हटा सकते। उनकी भूमिका शिकायत को जांच के लिए कलेक्टर बिलासपुर को भेजने की होगी। अगर पंचों पर भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलते हैं तो धारा 40 के तहत कार्रवाई होगी और कानून व्यवस्था बिगड़ने पर कलेक्टर की रिपोर्ट पर पंचायत भंग करने पर शासन विचार कर सकता है।

फिलहाल बहंतरा की सियासत गरमाई हुई है और ग्रामीण कलेक्टर से गुहार लगाने की तैयारी में हैं।

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