CG- शादीशुदा जिंदगी का अंत! शादी के बाद सामने आया पति की पहली शादी का राज, अमेरिका से भारत लौटी महिला ने दर्ज कराई FIR

बिलासपुर। पहली शादी और तलाक की बात छिपाकर दूसरी शादी करने, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मारपीट के आरोपों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस एनके व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की डिवीजन बेंच ने पति समेत छह आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ स्पष्ट और विशिष्ट आरोप लगाए गए हैं, जबकि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में तथ्यों की विस्तृत जांच किए बिना एफआईआर रद्द करना उचित नहीं होगा। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार कर दिया।
जानिए क्या है मामला?
दुर्ग जिले के रिसाली, भिलाई निवासी श्रद्धा मिश्रा ने पुलिस में शिकायत दी थी, 12 फरवरी 2024 को पुलगांव, दुर्ग स्थित अनंता ग्रीन में हिंदू रीति-रिवाज से उनकी शादी अंकित रावत से हुई थी। आरोप है कि शादी से पहले अंकित को अविवाहित, आर्थिक रूप से संपन्न और अमेरिका के न्यू जर्सी में मकान का मालिक बताया गया था। हकीकत ये उसकी पहले शादी हो चुकी थी और तलाक भी हो गया था।
शिकायत के अनुसार, शादी में मायके पक्ष ने करीब 10 लाख रुपये कैश, सोने-चांदी के जेवर और अन्य जरुरी सामान दिया था। इसके बावजूद कम दहेज लाने को लेकर ताने देते रहे और अतिरिक्त पैसों की मांग की गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि अमेरिका में पति के साथ रहने के दौरान श्रद्धा को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। गर्भावस्था और बेटी के जन्म के बाद भी उत्पीड़न जारी रहा। 28 अप्रैल 2026 को ससुर द्वारा नाबालिग बच्ची को गोद में लेकर शराब पीने पर आपत्ति जताने के बाद विवाद और मारपीट करने का आरोप लगाई है। बाद में श्रद्धा को बेटी के साथ भारत भेज दिया गया। महिला थाना, दुर्ग में शिकायत के बाद 18 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
तलाक की जानकारी पहले से थी, रिश्तेदारों को जानबुझकर फंसाया
याचिकाकर्ता आरोपियों की ओर से कहा गया कि अंकित और श्रद्धा का विवाह अमेरिका के न्यू जर्सी में हुआ था। यह भी दावा किया गया कि पहली शादी और तलाक की जानकारी श्रद्धा को पहले से थी। पति के कुछ रिश्तेदारों को मामले में अनावश्यक रूप से फंसाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई।
राज्य शासन ने दलील दी कि शिकायत में पहली शादी की जानकारी छिपाने, दहेज मांगने और प्रताड़ना के संबंध में सभी आरोपियों की भूमिका को लेकर आरोप हैं।
याचिका की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि विवाह कहां हुआ, यह विवादित तथ्य है। केवल अमेरिका का विवाह प्रमाणपत्र पेश करने से प्राथमिकी रद्द नहीं की जा सकती; इसके लिए विश्वसनीय साक्ष्य से तथ्य स्थापित करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जांच के शुरुआती चरण में आरोपों और साक्ष्यों का मुकदमे की तरह विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। डिवीजन बेंच ने इस टिप्प्णी के साथ याचिका को खारिज कर दिया है।



