नगरी में तेंदुए का आतंक! पहले सड़क पर दिखा, फिर गांव में घुसकर 3 लोगों पर किया हमला; दो धमतरी जिला अस्पताल रेफर..!

खुर्सीघाट मुख्य मार्ग पर भी दिखा तेंदुआ, गांव में घुसने से ग्रामीणों में दहशत; वन विभाग की टीम रवाना
नगरी, धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। बोरई मार्ग के खुर्सीघाट मुख्य मार्ग पर शाम के समय तेंदुआ विचरण करते दिखाई दिया। लोगों ने उसकी तस्वीरें भी मोबाइल में कैद कीं। इसके बाद रात में तेंदुआ ग्राम कारीपानी में घुस गया, जहां उसके हमले में दो महिलाओं समेत तीन लोग घायल हो गए। घायलों में दो की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल धमतरी रेफर किया गया है।
बैल का शिकार करने गांव में घुसा तेंदुआ, बचाने पहुंचे लोगों पर हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेंदुआ बैल का शिकार करने के लिए ग्राम कारीपानी में घुसा था। इसी दौरान आवाज सुनकर एक महिला घर से बाहर निकली और देखने पहुंची, तभी तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। महिला को बचाने पहुंचे दो अन्य लोग भी तेंदुए के हमले की चपेट में आ गए। इस घटना में तीन लोग घायल हो गए।
दो महिलाओं समेत तीन लोग घायल
घायलों की पहचान सुंदर लाल नेताम (60 वर्ष), निवासी ग्राम उजरावन, जो कारीपानी में मेहमान बनकर आए थे, उर्मिला बाई मरकाम (60 वर्ष) और मनाई बाई, दोनों निवासी ग्राम कारीपानी के रूप में हुई है।
घटना के बाद ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को उपचार के लिए नगरी अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद दो घायलों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल धमतरी रेफर कर दिया गया, जबकि एक महिला का उपचार नगरी अस्पताल में जारी है।
वन विभाग की टीम रवाना, ग्रामीणों में भय का माहौल
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हुई। गांव में तेंदुए के हमले की घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। खुर्सीघाट मुख्य मार्ग पर तेंदुआ दिखाई देने और फिर गांव में हमले की घटना ने क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
वन क्षेत्र में जाने से बचें, सतर्क रहने की अपील
घटना के मद्देनजर ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और विशेषकर सुबह-शाम अतिरिक्त सावधानी बरतें। तेंदुआ या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर उसके करीब जाने, पीछा करने या उसे घेरने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

