CG बर्खास्त ब्रेकिंग : DEO ने की बड़ी कार्रवाई, हेड मास्टर को किया बर्खास्त, इस वजह से हुई सेवा समाप्त……

सरगुजा। अंबिकापुर जिले के कलेक्टर अजीत वसंत की फटकार के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय हरकत में आया। जानलेवा हमले के आरोपी हेड मास्टर को डीईओ ने एक आदेश जारी कर बर्खास्त कर दिया है।
बता दें कि अदालत के फैसले की जानकारी देने में बीईओ ने कोताही बरती और फाइल जानबुझकर दबा दी। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर से दस्तावेजों के साथ शिकायत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने डीईओ को तलब कर पूछताछ की और नाराजगी जाहिर की थी। कलेक्टर की फटकार के बाद अब जाकर डीईओ ने बर्खास्तगी के संबंध में आदेश जारी किया है।
पढ़िए डीईओ ने अपने आदेश में क्या लिखा है?
कार्यालयीन आदेश 22 अक्टूबर 2026 द्वारा विजय कुमार यादव, प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी, विकास खण्ड उदयपुर, जिला सरगुजा (छ.ग.) को न्यायालयीन दोषसिद्धि एवं 48 घंटे से अधिक अवधि तक केंद्रीय जेल अम्बिकापुर में निरूद्ध रहने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) एवं 9 (2) (ख) के तहत निलंबित किया गया है।
न्यायालयीन दोषसिद्धि एवं दंडादेश
विजय कुमार यादव के विरुद्ध थाना मणीपुर में पंजीबद्ध अपराध में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश, अम्बिकापुर, जिला सरगुजा (छ.ग.) द्वारा सत्र प्रकरण में पारित निर्णय 03 जनवरी.2026 के तहत भारतीय दंड विधान की धारा 148, 323/149 (4 बार) तथा धारा 307/149 भा.दं.वि. (घातक हथियार से जानलेवा हमला एवं हत्या का प्रयास) के गंभीर व जघन्य अपराधों में दोषसिद्ध (Convicted) पाते हुए अधिकतम 05 वर्ष के सश्रम कारावास (RI) एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है। उक्त निर्णय के परिपालन में संबंधित कर्मचारी 03 जनवरी 2026 से 09 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अम्बिकापुर में सजा भुगतने हेतु निरूद्ध रहे हैं।
उच्च न्यायालय के आदेश की विधिक स्थिति
उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर द्वारा दांडिक अपील में पारित आदेश 08 अक्टूबर 2026 के द्वारा केवल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 430 के अंतर्गत मूल कारावास की सजा को अपील के निराकरण तक स्थगित (Suspension of substantive jail sentence) करते हुए जमानत का लाभ दिया गया है। उच्च न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि (Conviction) पर कोई रोक (Stay) नहीं लगाई गई है। विधि के सुस्थापित सिद्धांतों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘उप निदेशक कॉलेजिएट शिक्षा बनाम एस. नागूर मीरा (1995)’ एवं ‘के.सी. सरीन बनाम सी.बी.आई. (2001)’ में प्रतिपादित न्याय दृष्टांतों के अनुसार मात्र सजा का स्थगन अथवा अपील लंबित होना दोषसिद्धि को निष्प्रभावी नहीं करता और संबंधित कर्मचारी सक्षम न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध अपराधी की ही श्रेणी में रहता है।
आचरण की गंभीरता एवं नैतिक अधमता
शिक्षक का पद समाज में अत्यंत अनुकरणीय, मर्यादित, लोक विश्वास एवं भावी पीढ़ी के चारित्रिक निर्माण का केंद्र होता है। विजय कुमार यादव द्वारा घातक हथियार (चाकू/टांगी) से प्राणघातक हमला करने तथा हत्या के प्रयास जैसे जघन्य आपराधिक कृत्य में संलिप्त रहकर दोषसिद्ध होना घोर नैतिक अधमता (Moral Turpitude) को प्रदर्शित करता है। ऐसे आचरण वाले व्यक्ति का शिक्षा विभाग एवं शासकीय सेवा में बने रहना शाला के वातावरण, विद्यार्थियों के मानसिक विकास, जनहित तथा प्रशासनिक मर्यादा के सर्वथा प्रतिकूल है। यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के सर्वथा विपरीत होकर अक्षम्य कदाचरण है।
विधिक प्रावधान एवं अवसर
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) के द्वितीय परंतुक (a) तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 19 (i) के तहत यह स्पष्ट विधिक प्रावधान है कि दांडिक न्यायालय द्वारा आपराधिक आरोप में दोषसिद्ध शासकीय सेवक के विरुद्ध केवल उस आचरण के आधार पर जिस पर दोषसिद्धि हुई है, सीधे सेवा समाप्ति की शास्ति अधिरोपित की जा सकती है।
अतः सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकारी (Disciplinary Authority) होने के नाते, अधोहस्ताक्षरकर्ता द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 (आठ) सपठित नियम 19 (i) तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (a) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, विजय कुमार यादव, निलंबित प्रधान पाठक (मूल पदः प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला), शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी, विकास खण्ड उदयपुर, जिला सरगुजा (छ.ग.) को दोषसिद्ध आचरण एवं घोर नैतिक अधमता के आधार पर तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पदच्युत, बर्खास्त DISMISSED FROM SERVICE किया जाता है।
यह सेवा बर्खास्तगी इन विधिक शर्तों के अधीन होगी
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 (आठ) के अनुसार यह पदच्युति भविष्य में शासन के अधीन किसी भी नियोजन/पुनर्नियोजन के लिए सामान्यतः निरर्हता Disqualification होगी।
यदि भविष्य में अपीलीय न्यायालय (उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय) द्वारा संबंधित कर्मचारी को उक्त आपराधिक प्रकरण में पूर्णतः दोषमुक्त (Honourably Acquitted) किया जाता है, तो वे सेवा पुनर्बहाली हेतु नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के पात्र होंगे। यह आदेश सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन उपरांत तत्काल प्रभावशील होगा।
कार्रवाई के बाद इन अफसरों को दी जानकारी
सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग।
संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर (छ.ग.)।
आयुक्त, सरगुजा संभाग, अम्बिकापुर (छ.ग.)।
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, जिला सरगुजा (छ.ग.)।
संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग सरगुजा, अम्बिकापुर (छ.ग.)।
जिला कोषालय अधिकारी, अम्बिकापुर, जिला सरगुजा (छ.ग.)।



