छत्तीसगढ़

CG News : छत्तीसगढ़ में इस समाज ने बदले शादी के नियम, सगाई के बाद भी लड़का-लड़की फोन पर नहीं कर पाएंगे बात…..

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सेन समाज ने विवाह और सामाजिक परंपराओं को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। समाज की बैठक में शादी से जुड़ी कई पुरानी रस्मों में बदलाव करने का फैसला किया गया है। सबसे अहम निर्णय यह लिया गया है कि विवाह समारोह में होने वाली जूता-छिपाई जैसी रस्मों को पूरी तरह बंद किया जाएगा। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इन रस्मों के दौरान कई बार पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती थी, जिससे रिश्तों में तनाव पैदा होता था। इसी कारण समाज ने इस परंपरा को समाप्त करने का फैसला लिया है।

सगाई के बाद फोन पर बातचीत नहीं कर पाएंगे

इसके साथ ही सगाई के बाद और विवाह से पहले युवक और युवती के बीच मोबाइल पर निजी बातचीत पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुनीत राम सेन ने बताया कि सगाई के बाद कई बार फोन पर बातचीत के दौरान गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं, जिसके कारण शादी से पहले ही रिश्ते टूटने की नौबत आ जाती है। इन परिस्थितियों को रोकने और रिश्तों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह नियम बनाया गया है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में बातचीत जरूरी हो, तो वह माता-पिता की मौजूदगी में ही की जा सकेगी। समाज की प्रदेश इकाई इस फैसले को पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने पर भी विचार कर रही है।

सेन समाज के जिलाध्यक्ष संतोष कौशिक के मुताबिक मंगनी या सगाई के बाद यदि बिना उचित कारण रिश्ता तोड़ा जाता है तो जिम्मेदार परिवार के खिलाफ समाज की ओर से सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से अनावश्यक विवादों को रोका जा सकेगा और परिवारों को मानसिक व आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकेगा। समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष आशुतोष श्रीवास ने बताया कि समाज के सभी निर्णय अनुभव और सामूहिक सहमति के आधार पर लिए जाते हैं और हर सदस्य को इनका सम्मान करना चाहिए।

विवाह से जुड़ी अन्य परंपराओं में भी बदलाव किए गए हैं। रिश्ता तय करने के दौरान लड़का या लड़की पक्ष से अधिकतम 15 लोग ही दूसरे पक्ष के घर जाएंगे, ताकि किसी भी परिवार पर आर्थिक दबाव न पड़े। सगाई में अंगूठी पहनाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और केवल पुष्प भेंट करने का प्रावधान रखा गया है। वरमाला की रस्म केवल विवाह के समय ही होगी। इसके अलावा विवाह की हर रस्म में 100-100 रुपये देने का सामान्य नियम तय किया गया है।

समाज ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब विधवा महिलाओं को अपने पुत्र-पुत्री के विवाह सहित अन्य संस्कारों में पूरा अधिकार दिया जाएगा। बेटा न होने की स्थिति में बेटियों को अंतिम संस्कार में कंधा देने की अनुमति भी दी गई है। साथ ही समाज में छोटे-बड़े “पार” की परंपरा को खत्म कर समानता का संदेश दिया गया है। मृत्यु के बाद कफन ओढ़ाने की परंपरा बंद करते हुए मृतक परिवार को उनकी इच्छा अनुसार आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है।

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