छत्तीसगढ़

CG – देश की 16 वीं जनगणना में माहरा समुदाय भागीदार हो सुनिश्चित करें अपना संविधानिक अधिकार : विक्रम लहरें

देश की 16 वीं जनगणना में माहरा समुदाय भागीदार हो सुनिश्चित करें अपना संविधानिक अधिकार : विक्रम लहरें

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में माहरा/महरा समाज को 1992 में हुई एक मात्रात्मक त्रुटि के कारण प्रदेश के लगभग 6 लाख लोगों को वर्षों तक संवैधानिक अधिकार से वंचित रहना पड़ा था।

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले सहित राज्य भर में महरा/माहरा जाति को केंद्र सरकार द्वारा जुलाई-अगस्त 2023 में ‘संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ के माध्यम से आधिकारिक रूप से अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल किया गया है। हमारे भारत देश की पिछली जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। जिस कारण वर्ष 2023 में संशोधित व पारित माहरा जाति का सामुदायिक आंकड़ा अब तक 2011 के जनसंख्या में शामिल नही हो सका था। जिस कारण इस समुदाय को संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।

1 अप्रैल 2026 से शुरू प्रथम चरण की जनगणना 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें घर-घर जाकर 33 प्रमुख प्रश्न पूछे जाएंगे। जिसमें परिवार का विवरण कालम में परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और समुदाय (SC/ST/अन्य)का उल्लेख किया जाना है।

भारत सरकार की गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में जनगणना से संबंधित प्रपत्र की क्रमांक 12 में अनुसूचित जाति की क्रम में जरूर अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाले समस्त जातीय समूदाय को इसमें अपने जाति का उल्लेख सूझबूझ से करनी होगी।

हमारे अनुसूचित जाति सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं को प्रमुखता से बस्तर जिला में माहरा जाति से संबंधित समूदाय के साथ साथ अन्य अनुसूचित जाति समुदायों को गंभीरता व जवाबदेही के साथ अपने गांवों व पारा टोलों तक जाकर जाति उल्लेख करने जागरूक करना होगा।

सर्व अनुसूचित जाति जिला अध्यक्ष होने के नाते आप सभी भाईयों से मेरा अपील है कि इस 16वीं जनगणना व स्वतंत्र भारत की 8 वीं जनगणना में जरूर अपनी जाति के कालम में प्रमुख से सतनामी, अहिरवार, मोची,चमार, रामनामी , बसोर, बलाही,बागरी, भंगी, चडार, चिडार, डोम , गंडा, घासी, कंजर, कलीचा, खटिक, कोरी, महार ,पासी और तुर्री जाति की तरह माहरा जाति का उल्लेख जरूर करवाना सुनिश्चित करें ताकि बस्तर जिला में अनुसूचित जाति की जनसंख्या संबंधित संधारण होकर संशोधित आंकड़ा प्रस्तुत हो बस्तर जिला में अनुसूचित जाति का आरक्षण प्रतिशत संख्या में बढ़ोतरी हो सके जिससे हमारे भावी पीढ़ी को सामाजिक , राजनैतिक व आर्थिक आधार संविधानिक रूप से संरक्षित एवं सुरक्षित के साथ सुनिश्चित हो।

Related Articles

Back to top button