छत्तीसगढ़

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गोस्वामी समाज गौरव अलंकरण से सम्मानित हुईं युवा लेखिका डॉ. शिखा गोस्वामी

रायपुर। शहीद स्मारक भवन रायपुर छत्तीसगढ़ में दशनाम गोस्वामी समाज द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में युवा लेखिका एवं साहित्यकार डॉ. शिखा गोस्वामी निहारिका को उनके साहित्यिक गतिविधियों के जरिए समाज को गौरांवित करने के लिए डॉ. महंत रामसुंदर दास (दुधाधारी मठ) के कर कमलों से समाज गौरव अलंकरण 2025 और 2026 से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र के साथ स्वर्गीय लक्ष्मण पुरी गोस्वामी की स्मृति में पुत्र राजेन्द्र पुरी गोस्वामी (प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व) गोस्वामी समाज छत्तीसगढ़ के द्वारा ₹1008 की सम्मान राशि भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में उपस्थित समाज के गणमान्य लोगों, संत-महात्माओं एवं अतिथियों की उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह के दौरान डॉ. शिखा गोस्वामी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कमी किसी को कमजोर नहीं बनाती, बल्कि वही कमी इंसान को मजबूत बनाती है। किसी की कमी ही इंसान को वह बना देती है, जो सामान्य लोग नहीं कर पाते। उनके इन प्रेरणादायक शब्दों ने उपस्थित सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया और खूब तालियां मिली।

उन्होंने अपने वक्तव्य में समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज जो भी वह हैं, उसमें उनके समाज का महत्वपूर्ण योगदान है। समाज द्वारा मिले निरंतर प्रोत्साहन ने ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

अंत में निहारिका ने अपनी प्रसिद्ध कविता _ मानुष जनम अमोल है बंदे, मिले ना यह हर बार है। शिखा कहती कर ले नेकी, वरना जीना बेकार है….. का भावपूर्ण पाठ किया, जिसे सुनकर पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो गया। उनकी प्रस्तुति से कई श्रोता भावुक हो उठे और पूरे हाल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। यह सम्मान न केवल उनके साहित्यिक योगदान का प्रतीक है, बल्कि पूरे गोस्वामी समाज के लिए गर्व का विषय भी है।

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