छत्तीसगढ़

CG – मस्तूरी के प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यशैली पर लगा प्रश्न चिन्ह गरीब परिवारों के इट भठ्ठे में त्वरित कार्रवाई पर भिलौनी और कुकुर्दीकला जैसे मामले में हों जाते हैँ खामोश? कानून सिर्फ गरीबों के लिए जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के मस्तूरी में बैठे प्रशासनिक अधिकारियों की कार्य शैली पर लगातार सवाल खड़े हों रहें हैँ मस्तूरी एसडीएम लगातार सुर्खिया बटोरने का कार्य कर रहें हैँ पहले कुकुर्दीकला में हुआ रेत घाट के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई सवालों के घेरे में रहा यहाँ कई वीडियो वायरल हुआ जिसमे साफ महिलाएं दूसरे गाँवों से आने की बात कुबूल कर रहें थे कई महिलाएं तो एजेंट बन कर समर्थन पत्र बांटते और खुद साइन करते नजर आ रहें हैँ यहाँ जन सुनवाई के लिए ग्रामीणों कों गाड़ी में भर भर कर लाया गया और ताज्जुब की बात तो ये हैँ की यहाँ मस्तूरी के सारे अधिकारी मौजूद थे और उनके आँखों के सामने हीं यह सब हों रहा था फिर भी इनकी नजर में सब ठीक हैँ कोई सवाल नहीं कोई समस्या नहीं क्या ऐसे अधिकारियों की मस्तूरी क्षेत्र और यहाँ की जनता कों जरुरत हैँ?

वैसे तो ये अधिकारी गरीब परिवारों के जीवन यापन के लिए किए जा रहें कार्यों जैसे इट भठ्ठा में तुरंत कार्रवाई करने पहुंच जाते हैँ और कार्रवाई कर उसको शील भी कर देते हैँ पर ज़ब बात रेत घाट जैसी जनसुनवाई की आती हैँ जिस पर कई सवाल खड़े हों रहें हैँ वहां इनकी चुप्पी देखने लायक होती हैँ ये अधिकारी बात जब अवैध रेत घाट में कार्रवाई करने की आती हैँ तो बचते नजर आते हैँ भिलौनी में रात रात भर अवैध रुप से रेत घाट चलाया जा रहा हैँ यहाँ ये खामोश हों जाते हैँ यहाँ इनकी कार्रवाई और इनकी सक्रियता शून्य हों जाती हैँ पर गरीब परिवार जिसके सहारे जीवन यापन कर रहें हैँ उन गरीबों के पेट में लात मारने में पीछे नहीं रहते क्या ये सिस्टम और कानून सिर्फ गरीब परिवारों के लिए बनाया गया हैँ।

ज़ब इट भठ्ठे पर कार्रवाई हों सकती हैँ तहसीलदार मौक़े पर पहुंच कर पंचनामा तैयार कर सकते हैँ तो भिलौनी जैसे अवैध रेत घाट पर या कुकुर्दीकला में हुए जनसुनवाई जो सवालों के घेरे में हैँ कई वीडियो वायरल हुआ वहां ये अधिकारी चुप क्यों हों जाते हैँ कौन सी मज़बूरी यहाँ इनकों रोक लेती हैँ आखिर जनता किसके पास जाएगी अपनी फरियाद लेकर और क्यों जो गैर कानूनी काम कर रहें हैँ रेत की चोरी कर रहें हैँ रात के अँधेरे में उन पर कार्रवाई करने से अधिकारी दूर भागते हैँ क्या ऐसे में लोंगो का सरकार के प्रति विश्वास कम नहीं होगा ये बात इन अधिकारियों कों पता नहीं हैँ आखिर कब तक मस्तूरी में ऐसा चलता रहेगा?

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