CG – गतौरा प्रबंधक कोमल चंद्राकर ज़मानत पर रिहा किन्तु पद पर बरकरार साहकारिता विभाग में भ्रष्टाचारियों कों कौन दे रहा संरक्षण जानें कुर्सी के पीछे का पूरा खेल पढ़े पूरी ख़बर
बिलासपुर//जिले का मस्तूरी और यहाँ का गतौरा धान खरीदी केंद्र का मामला किसी से छीपा नहीं है यहाँ साल 2025-26 में लगभग 28 लाख का घोटाला हुआ था जिस पर साहकरिया विभाग बिलासपुर द्वारा एक्शन लिया गया और कोमल चंद्राकर के साथ दों अन्य के नाम मस्तूरी थांनें में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी दों लोंगो कों जेल भी भेजा गया पर एक अब भी फरार है।
बतातें चलें की कोमल चंद्राकर जो गतौरा धान खरीदी केंद्र का प्रबंधक है इसके अलावा वो दर्रीघाट का भी प्रबंधक है चूकि कोमल चंद्राकर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा और वो जेल भी गया पर ज़मानत पर आते हीं उसको विभाग में फिर से तैनाती मिल गई क्या ये कई सवालों कों जन्म नहीं दे रहा आखिर इतने बड़े लाखों के घोटाले बाज कों इतना राजा महाराजा जैसा विभाग क्यों ट्रीट कर रहा है जब की विभागीय जाँच जारी है क्यों भ्रष्टाचार करने वालों पर विभाग इतना मेहरबान है बतातें चलें की कोमल चंद्राकर पर किसानों से धोखा करने का भी आरोप लगा है कर्रा के हीं किसान इनपर बिना जानकारी के सीसी में डबल कर्जा चढ़ाने कों लेकर शिकायत भी कर चुके है तो क्या विभाग भाजपा सरकार की सुशासन की सरकार की छवि कों धूमिल करने का उदेश्य रखता है क्या इससे भाजपा सरकार की लोंगो के बीच इमेज बर्बाद नहीं होंगी क्या इससे लोंगो के बीच सरकार के प्रति विश्वास कम नहीं होगा?
ऐसा नहीं है की कोमल का विरोध सिर्फ दर्रीघाट में हों रहा है यहाँ तो किसान कोमल चंद्राकर कों हटाने की मांग कर हीं रहें है पर विभाग के अंदर हीं इसका जमकर विरोध हों रहा है दर्रीघाट जैसे जगह में अब दों 2 प्रबंधक है कोमल चंद्राकर के जेल जानें के बाद उनकी जगह टिकारी वाले कों यहाँ बैठाया गया था अब किसान भी कन्फ्यूज है की काम किससे कराए जबकि लोंगो कों अब कोमल चंद्राकर पर विश्वास नहीं हों पा रहा है चूकि यही समय था पिछले साल ज़ब कोमल नें किसानों के खातें में अतिरिक्त खाद चढ़ा कर बताया भी नहीं था जिसका कर्ज आज भी किसानों के खातें से नहीं कटा है।
अजीब बात है ना एक तरफ विभाग जाँच भी करा रही है दूसरी तरफ वही इंसान उस पोस्ट में है जिस पर आरोप है फिर ये कैसा जाँच क्या पोस्ट में रहकर कोमल जाँच कों प्रभावित नहीं करेगा आज तक कही भी भ्रष्टाचारियों पर ज़ब जाँच हुई है तब तब आरोपी कों पद से हटा कर हीं किया गया है ताकि जाँच निष्पक्ष हों पर बिलासपुर सहकारिता विभाग राम भरोसे हीं चल रहा है यहाँ कुछ भी हों सकता है।




