CG – शिवपुर पंचायत में सरपंच पति राज से महिला आरक्षण का उड़ा माखौल…! सरपंच ललिता कंवर सिर्फ नाम की पति चुन्नीलाल बने अघोषित सरपंच पढ़े पूरी ख़बर
0 एसपी का फरमान- मेरी मर्जी के बिना किसी का राशनकार्ड नही बनेगा.
0 बैठकों से लेकर निर्माण कार्यों तक हर जगह पति का दखल, ग्रामीणों में आक्रोश.
कोरबा//जनपद पंचायत पाली के ग्राम पंचायत शिवपुर में पंचायती राज कानून और महिला आरक्षण की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है। यहां निर्वाचित महिला सरपंच श्रीमती ललिता कंवर है, लेकिन पंचायत की कमान उनके पति चुन्नीलाल ने संभाल रखी है और पंचायत की बैठकों से लेकर प्रस्ताव तैयार करने व निर्माण कार्यों तक हर जगह एसपी का अनावश्यक दखल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के सभी कामकाज निर्वाचित महिला सरपंच के स्थान पर उसके पति अपने हाथों में ले रखे है, सरपंच महज रबर स्टैम्प बनकर रह गई है। पंचायत की हर बैठक में महिला सरपंच के बगल में उसका पति कुर्सी पर बैठता है, सभी प्रस्ताव और एजेंडा सरपंच पति ही तय करता है, निर्माण कार्यों के ठेके, मजदूरी भुगतान, मटेरियल सप्लाई सब पर एसपी का सीधा नियंत्रण है, विरोध करने वाले ग्रामीणों को धमकी दी जाती है कि सरकारी योजनाओं से वंचित कर देंगे। ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच पति ने मौखिक फरमान जारी कर दिया है कि ‘बिना मेरी सहमति के गांव में किसी का नया राशन कार्ड नही बनेगा।
गरीब हितग्राही राशन कार्ड के लिए सरपंच पति का चक्कर काटने को मजबूर है। जो विरोध करता है उसका काम रोक दिया जाता है। शिवपुर पंचायत में एसपी हुकूमत को लेकर ग्राम स्तर पर बनाए गए एक वाट्सअप ग्रुप ‘आम नागरिक ग्रापं. शिवपुर’ में बीते दिनों स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूटा है और उन्होंने सरपंच से कई तरह के सवाल किए है, जिसमे भी सरपंच पति ने जवाब तलब किया है। एक ग्रामीण ने तो वाट्सअप ग्रुप में लिखा है कि मैं तो आजतक सरपंच महोदया को ग्राम सभा मे विकास की बात करते हुए कभी नही देखा हूँ। बात करते हुए सिर्फ उसके पति को ही देखा हूँ उसके पक्ष में जो कि उसके पति के हाथ मे सरपंच का पॉवर नही है, बल्कि वह आम नागरिक है।
इसी तरह एक अन्य ग्रामीण ने लिखा है कि मुझे राशन कार्ड बनवाना था, लेकिन सरपंच पति ने मना कर दिया मेरे बिना किसी का राशन कार्ड नही बनना चाहिए। सरपंच पति के अघोषित सरपंची को लेकर अनेकों ग्रामीणों ने वाट्सअप ग्रुप पर विरोध करते हुए अपना- अपना तर्क रखा है। बता दें कि पंचायती राज अधिनियम में सरपंच पति का कोई पद नही है। पंचायत चुनाव में महिला आरक्षण के नियम अनुसार 73वां संविधान संशोधन व छ.ग. पंचायत राज अधिनियम 1993 के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान है। इसका उद्देश्य महिलाओं को निर्णय लेने की शक्ति देना है, न कि उनके पति/ रिश्तेदार को। पंचायत संचालन नियमावली 1995 स्पष्ट करती है कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि को ही बैठकों की अध्यक्षता करनी है, प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने है और चेक पर साइन करने है।
पति या रिश्तेदार का कोई वैधानिक अधिकार नही है। यदि कोई सरपंच/ पंच अपने कर्तव्यों का निर्वहन नही करता या उसके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति कार्य करता है तो छ.ग. पंचायत राज अधिनियम धारा 40 के तहत कलेक्टर उसे पद से पृथक कर सकते है। सरपंच पति द्वारा काम करना इसी धारा के तहत अपराध है। किंतु शिवपुर पंचायत में सरपंच पति राज कायम है, जिसे लेकर ग्रामीणों का दर्द छलका है और उनका कथन है- हमने ग्राम विकास और महिला नेतृत्व को लेकर ललिता को वोट दिया था, लेकिन यहां तो उसका पति चुन्नीलाल सरपंच बन बैठा है तथा पंचायत के सभी सरकारी दस्तावेजों, प्रस्तावों, भुगतान पत्रकों पर फैसले एसपी लेते है।
यहां तक कि गरीब का राशन कार्ड भी उनके मर्जी से बनता है। ये तो महिला अधिकारों की हत्या है। अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार पंचायतों में 50% महिला आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण की बात करती है तो शिवपुर पंचायत में निर्वाचित महिला सरपंच के स्थान पर उसके पति खुलेआम पंचायत कैसे चला रहा है? क्या महिला सरपंच केवल नाम की बनी है? महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकार सुरक्षित करने हेतु यहां प्रशासन के दखल की आवश्यकता ग्रामीण महसूस कर रहे है और उनकी मांग है कि शिवपुर पंचायत में वरिष्ठ करारोपण स्तर के अधिकारी को प्रेक्षक नियुक्त किया जाए।




