छत्तीसगढ़

CG – जोंधरा में दिखा पारंपरिक सांस्कृतिक और मित्रता के लोक पर्व भोजली त्यौहार का भारी उत्साह लोंगो नें बढ़ चढ़ कर लिया हिस्सा युवा नेता नें बताई इससे जुड़ी खास बात पढ़े पूरी ख़बर

जोंधरा//मस्तूरी ब्लॉक के जोंधरा गाँव में रविवार दिनांक 30 अगस्त को भोजली का पावन त्यौहार बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया।

सावन के इस पारंपरिक पर्व पर गांव के हर घर से माताएं-बहनें एक से बढ़कर एक सुंदर सजी हुई टोकरियों में हजारों की संख्या में भोजली लेकर निकलती नजर आईं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सिर पर भोजली रखकर लोकगीतों पर झूमते हुए नृत्य किया, वहीं पुरुष वर्ग भी हाथों में भोजली लिए उत्सव में शामिल हुए। इस दौरान बाजे-गाजे की धुन पर पूरा गांव झूम उठा और छत्तीसगढ़ की संस्कृति व संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

ग्राम की सरपंच कांति किरण पटेल द्वारा इस अवसर पर एक विशेष प्रतियोगिता का आयोजन भी रखा गया था। जिसकी भोजली की टोकरी सबसे सुंदर और अच्छी तरह सजी होगी, उसे पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर गांव के गणमान्य नागरिक भी भोजली के रंग में रंगे नजर आए और सभी ने मिलकर पर्व को यादगार बना दिया।

गाँव के युवा नेता विष्णु केंवट नें बताया…

भोजली उत्सव छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पारंपरिक, सांस्कृतिक और मित्रता का लोक पर्व है, जो मुख्य रूप से रक्षाबंधन के ठीक दूसरे दिन यानी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। भोजली पर्व प्रकृति, अच्छी फसल और अटूट स्नेह का प्रतीक है। इसे ‘अन्न की देवी’ की आराधना का त्योहार भी माना जाता है। इस पर्व के माध्यम से ग्रामीण जन अच्छी वर्षा और लहलहाती फसल के लिए प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

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