
धमतरी जिले का नगरी विकासखंड…और इसी विकासखंड का दुर्गम रिसगांव क्षेत्र। घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसे इस इलाके में आज भी ग्रामीण पक्की सड़क, पुल-पुलिया और पर्याप्त बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
बरसात शुरू होते ही हालात और मुश्किल हो जाते हैं। कई गांवों का नगरी मुख्यालय से संपर्क करीब चार महीने तक बाधित रहता है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता।
लेकिन इन विषम परिस्थितियों के बीच डॉ. दुर्गेश साहू वर्ष 2012 से रिसगांव में मुख्यालय निवास कर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दुर्गम रास्तों, बारिश और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा।

बताया गया कि उनके कार्यक्षेत्र में पिछले 10 वर्षों से एक भी मातृ मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। वहीं शिशु मृत्यु दर को भी न्यूनतम स्तर पर बनाए रखने में स्वास्थ्य विभाग को सफलता मिली है।
टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, कुपोषण नियंत्रण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी इस क्षेत्र में बेहतर परिणाम सामने आए हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में डॉ. साहू कई बार पैदल ही दुर्गम गांवों तक पहुंचकर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
उनकी इसी निष्ठा और कर्तव्यपरायणता को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया। सम्मान मिलने के बाद पूरे नगरी अंचल में खुशी और गर्व का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, वहां लगातार 12 वर्षों तक रहकर लोगों की सेवा करना अपने आप में मिसाल है। डॉ. दुर्गेश साहू जैसे स्वास्थ्यकर्मी न केवल वनांचल के लोगों के लिए भरोसे का केंद्र हैं, बल्कि दूसरे कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं।
सड़क और संचार जैसी चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य सेवा की यह निरंतरता बताती है कि समर्पण और जिम्मेदारी के साथ काम करने वाले लोगों की भूमिका वनांचल क्षेत्रों में कितनी महत्वपूर्ण है। अब जरूरत है कि ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को भी मजबूत किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बेहतर जीवन और स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल सकें।