CG – पोड़ी क्षेत्र में बेखौफ परस्पर संचालित हो रहा बावनपरी का खेल, शातिर मास्टरमाइंड संचालक के इशारे पर रोज ठिकाना बदलकर सज रहा जुए का फड़, लाखों के दांव पर लूट रहे लोग पढ़े पूरी ख़बर
कोरबा//पाली ब्लाक का पोड़ी इन दिनों जुआ के कारण काफी चर्चा में है। यहां एक शातिर जुआरी के संरक्षण में बावनपरी का फड़ परस्पर और बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है। इस दो नंबरी खेल ने न केवल पोड़ी बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक ताने- बाने को तहस- नहस कर दिया है और कई हंसते- खेलते परिवारों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। युवा पीढ़ी का रुझान भी इस गर्त की ओर है, जिसमे वे दांव लगा रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पोड़ी क्षेत्र में जुए का संचालन कोई साधारण नही, बल्कि एक सोची- समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। इसका मास्टरमाइंड स्थानीय एक शातिर जुआरी है। वह पुलिस की नजरों से बचने के लिए रोजाना फड़ का स्थान बदल देता है। सूत्र बताते हैं कि इसके मुख्य अड्डे ग्राम पोड़ी के लीमघाट, सलिहाभाठा, नगोई पंचायत के लोहड़िया और पोलमी पंचायत के कारीछापर व दर्रापारा के घने जंगल और गांव के खाली पड़े मकान हैं, जहां जुए की महफ़िल सजाई जाती है। इस खेल को शातिराना तरीके से संचालित किया जा रहा है और जुआ संचालक जिस स्थान पर फड़ लगाता है, उसके कुछ दूरी पर अपने निजी मुखबिर तैनात कर रखे हैं।
ये मुखबिर दोपहर 12 बजे से रात 7- 8 बजे तक चलने वाले उक्त खेल के दौरान हर आने- जाने वाले पर पैनी नजर रखते हैं तथा किसी अनजान व्यक्ति या पुलिस गाड़ी की आहट मिलते ही मोबाइल से तुरंत संचालक को सूचना देते हैं और फिर पूरा फड़ मिनटों में समेट लिया जाता है। इसी चालाकी से संचालक और जुआरी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बचते आ रहे हैं। इस फड़ में पोड़ी के अलावा पाली, लाफा, सिल्ली और सीमावर्ती बिलासपुर जिले के रतनपुर तक से जुआरी दांव लगाने पहुँच रहे हैं। सूत्रों की माने तो यहां रोजाना लाखों रुपये के दांव लगते हैं। जहां इस पूरे खेल से संचालक को केवल नाल (कमीशन) के रूप में ही प्रतिदिन 10 से 15 हजार रुपये की अवैध कमाई हो रही है।
खेत, जेवर, घर तक गिरवी! हार- जीत के जाल में उजड़ रहे परिवार
यह सिर्फ जुआ नही, बल्कि समाज के पतन की कहानी है। जीत की लालसा में कई लोग अपने खेत, पत्नी के जेवर, घर और वाहन तक गिरवी रखकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, हारने पर कर्ज के बोझ में दब रहे हैं, गांव में पारिवारिक कलह, लड़ाई- झगड़े बढ़ गए हैं, कई घरों में बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है, युवा पीढ़ी जो खेत- खलिहान और रोजगार में लगने चाहिए, वह इस लत की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। ज्ञात हो कि बीते दिनों *दीपावली से पहले सक्रिय हुए बावनपरी संचालक, पाली क्षेत्र के पोड़ी और नुनेरा में सजने लगे जुए के फड़, लगने लगे लाखों के दांव* शीर्षक के साथ खबर प्रसारित किया गया था, लेकिन पोड़ी के जुआ संचालक के हौसले इतने बुलंद है कि वह बेखौफ होकर खेल चला रहा है, जैसे उसे न पुलिस का भय हो न कानून का।
पुलिस के लिए चुनौती, लेकिन उम्मीद भी…
यह मानना होगा कि पुलिस के सामने यह एक चुनौती है, क्योंकि जुआ संचालक बेहद शातिर है और मुखबिर तंत्र का उपयोग कर रहा है। लेकिन पाली पुलिस ने हमेशा ही ऐसे संगठित अपराधों पर सख्त कार्रवाई की है। आवश्यक है कि पुलिस भी अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय करते हुए इस फड़ का भंडाफोड़ करें। जरूरत है जुआ फड़ के लिए चिन्हित जंगल और उन रास्तों पर औचक दबिश की, जहां जुआ सजते हैं। पुलिस की एक सख्त कार्रवाई ही जुआ के मकड़जाल में फंसे परिवारों और युवाओं को इस पतन के रास्ते से वापस ला सकती है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों की स्थानीय पुलिस से मांग है कि इस अवैध खेल के मास्टरमाइंड और उसके नेटवर्क को चिन्हांकित कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि दो नंबरी लोगों पर वर्दी और कानून का भय हमेशा बना रहे तथा समाज मे अमन- चैन कायम हो सके।




