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CG – जैतपुरी में वन माफियाओं पर शिकंजा,15 साल से वन भूमि पर कब्जा, अब वन विभाग का बड़ा एक्शन,36 आरोपियों को कोर्ट ने भेजा जेल…!

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के जैतपुरी इलाके में जंगलों की कटाई और अवैध अतिक्रमण मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 36 आरोपियों को जेल भेज दिया है…करीब 15 वर्षों से चल रहे इस मामले में अब कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है…उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के जैतपुरी गांव में वन भूमि पर अवैध कब्जे और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के आरोप में कुल 166 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

इनमें से 36 आरोपियों ने वन विभाग के सामने सरेंडर कर दिया, जिन्हें सोमवार को बयान और मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

वन विभाग के मुताबिक, मामले में 4 आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी, जबकि बाकी 126 आरोपियों पर कार्रवाई जारी है…पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए आरोपियों को 30-30 के समूह में बुलाया जा रहा है।

यूएसटीआर के उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, पिछले 15 वर्षों के दौरान जैतपुरी क्षेत्र में 100 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अवैध कब्जा किया गया…आरोप है कि कब्जे के लिए करीब एक लाख से अधिक पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा।

बताया जा रहा है कि आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद वन विभाग ने गिरफ्तारी प्रक्रिया तेज कर दी, जिसके बाद बड़ी संख्या में आरोपी सरेंडर करने सामने आए।

कुछ दिन पहले जब वन विभाग की टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जैतपुरी गांव पहुंची थी, तब ग्रामीणों और वन अमले के बीच विवाद और धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई थी।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक रंग ले बैठा और विपक्ष ने वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए…वहीं अब अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर पर्यावरण सुधार कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

वन विभाग ने 50 हजार कंटूर ट्रेंच बनाने, आधुनिक कैमरों से निगरानी रखने और पूरे क्षेत्र में फेंसिंग करने की योजना तैयार की है, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।

फिलहाल जैतपुरी अतिक्रमण मामला प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि बाकी आरोपियों पर कार्रवाई कितनी तेजी से पूरी होती है और वन विभाग अपनी पर्यावरण संरक्षण योजना को जमीन पर कितना सफल बना पाता है।

 

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