CG 3 कर्मचारी सस्पेंड : फर्जी सर्पदंश मामले में 3 कर्मचारी सस्पेंड, कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से किया निलंबित, बीते दिन हुई थी गिरफ्तारी…

डेस्क : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चर्चित फर्जी सर्पदंश मुआवजा मामले में गिरफ्तार 3 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। ताजा अपडेट के अनुसार इस मामले में अभी 8 कर्मचारियों के बयान होने बाकी रह गए हैं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने किया सस्पेंड
आपको बता दें बीते दिन गिरफ्तारी के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तीनों आरोपियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसमें नरेंद्र कुमार कौशिक, हरीश राठौर और गरीब दास बिंझवार का नाम शामिल है।
तीनों के खिलाफ पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR
आपको बता दें बीते दिन 27 जुलाई सोमवार को गिरफ्तारी के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ और छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला। जिसमें संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा था। इतना ही नहीं इसमं जरूरत पड़ने पर सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी थी।
इनकी हुई थी गिरफ्तारी
आपको बता दें सोमवार को तहसील कार्यालय के कर्मचारी गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके पहले गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉक्टर प्रियंका सोनी की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। अब पुलिस के अनुसार अब 8 अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज होने हैं।
क्या हैं संघ की मांगें
तीनों मामलों की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए।
शेष राजस्व लिपिकों पर फिलहाल कार्रवाई रोकी जाए।
वास्तविक दोषियों की भूमिका तय कर उन्हीं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
कर्मचारियों को विधिक संरक्षण और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिया जाए।
डॉक्टर ने बनाई दो शवों की फर्जी पीएम रिपोर्ट
पुलिस के मुताबिक, तहसील कार्यालय के नायब नाजीर (सीनियर क्लर्क) की शिकायत पर महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम तत्कालीन सिम्स डॉक्टर प्रियंका सोनी ने किया था और स्नेक बाइट से मौत होने की फर्जी रिपोर्ट बनाई थी।
इसी आधार पर पुलिस ने 18 जुलाई को डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
मृतकों के रिश्तेदार और वकील पहले से जेल में
इससे पहले इस मामले में दोनों मृतकों के रिश्तेदार और एक वकील समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा स्नेक बाइट के 15 मामलों की जांच में 4-5 और डॉक्टरों की बनाई पीएम रिपोर्ट संदिग्ध बताई जा रही है।
रिश्तेदार और वकील पहले ही जा चुके हैं जेल
इन दोनों मामलों में मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और वकील रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताए जा रहे वकील श्रवण वस्त्रकार फिलहाल फरार है। पुलिस के मुताबिक, वह लंबे समय से गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा है।
डॉ. सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी केस
डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी एक अलग केस दर्ज है। आरोप है कि तालापारा निवासी पवन यादव की मौत को उन्होंने स्नेक बाइट बताया था, जबकि जांच में मौत का वजह हार्ट अटैक निकली थी।
इस मामले में पवन यादव की पत्नी और एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। सिविल लाइन पुलिस अब जेल से प्रोडक्शन वारंट पर डॉ. प्रियंका सोनी को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी।
16 जुलाई को 4 आरोपी गिरफ्तार
16 जुलाई को सरकंडा थाना पुलिस ने फर्जी स्नेक बाइट के पांच मामलों में कार्रवाई करते हुए वकील हीराप्रसाद खाण्डेकर, बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, कथित वकील महेन्द्र कुमार और तहसीलदार के ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
डॉ. सोनी की पहले भी हो चुकी अरेस्ट
साल 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को स्नेक बाइट बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का पहला मामला प्रकाश में आया था। उस मामले में भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
कई डॉक्टर जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार, बिलासपुर जिले में फर्जी स्नैक बाइट से मौत दिखाकर मुआवजा दिलाने के 15 केस की जांच चल रही है। सभी मामलों की समीक्षा कर सबूत जुटाए जा रहे हैं।
जांच के दायरे में अभी 4-5 डॉक्टर
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने के मामले में अभी सिम्स के 4-5 डॉक्टर्स पर और तलवार लटकी है। जांच जारी है। कुछ डॉक्टरों से पूछताछ की जा चुकी है और आने वाले दिनों में इन मामलों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।



