छत्तीसगढ़

CG – मस्तूरी के हिर्री में मनरेगा बना भ्रष्टाचार का अड्डा फर्जी हाजिरी को लेकर फिर शिकायत की तैयारी पूर्व में भी हो चुकी है जांच पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के मस्तूरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत हिर्री में मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। ग्रामीणों ने तालाब गहरीकरण और अन्य निर्माण में बड़े पैमाने पर फर्जी मस्टररोल भरने का आरोप लगाया है। शिकायत की तैयारी शुरू हो गई है। खास बात ये है कि हिर्री में पहले भी इसी तरह के मामले में जांच हो चुकी है। हिर्री में मनरेगा से तालाब गहरीकरण और आवास मे निर्माण मे घपला होनें की बात खुद पंचायत के पंच कर रहें है। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर मजदूर काम करते दिखते हैं, लेकिन मस्टररोल में जितने काम करते है उनसे कही ज्यादा लोंगो का हाजरी डाला जा रहा है।

हालांकि इसमें कौन कितना सही है ये तो जाँच होनें के बाद ही पता चल पाएगा पर आरोप गंभीर है कुछ पंच नाम नहीं छपाने की शर्त पर बताते है की ज़ब तक काम चला तब तक लोंग बाइक मे बैठ कर सिर्फ फोटो खींचाने के लिए पहुंचा करते थे और बिना कुछ काम किए मजदूरी का राशि ले रहें है जबकि जो लोंग काम कर रहें है वो गढ्ढा खोद कर जाते है और इसी कारण गाँव वालों मे गुस्सा है उनका कहना है की इस साल हुए मनरेगा परिवर्तित नाम वी बी जी राम जी मे जितना भी काम हुआ है और जितने लोंगो का नाम चढ़ाया गया है सबकी जाँच होनी चाहिए और इसकी शिकायत के बाद यहाँ हुए सभी घपलो की परत दर परत पर्दा उठेगा।

पहले भी हो चुकी है जांच…

हिर्री पंचायत मनरेगा घोटाले के लिए बदनाम रही है यहाँ लगातार मनरेगा के कार्यों मे फर्जी भुगतान का मामला सामने आता रहा है सरपंच सचिव कोई भी हो पर यहाँ शिकायत का दौर नहीं थम रहा पर 2025 में नोटिस तालाब निर्माण में सचिव-रोजगार सहायक को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि “हर बार जांच होती है, पर कार्रवाई के नाम पर लीपापोती हो जाती है। इसलिए हौसले बुलंद हैं।”

ग्रामीणों की नई रणनीति…

इस बार ग्रामीणों ने तय किया है कि शिकायत सीधे जिले मे उच्च अधिकारियो से करेंगे और यही से एक जाँच टीम गठित करने की मांग करेंगे मस्टररोल की कॉपी, काम की जगह के फोटो-वीडियो और बैंक स्टेटमेंट सबूत के तौर पर लगाएंगे। “अबकी बार FIR कराकर ही दम लेंगे”ऐसा गुस्साए ग्रामीणों का और कुछ पंचो का कहना है।

ग्रामीण नाम गुप्त रखने की बात पर बताते है की यहाँ कुछ ऐसे भी लोंग है जिनका प्रधानमंत्री आवास योजना मे नाम आया था और उनका आवास निर्माण कराए बिना ही पुराने घर कों लीपा पोती कर के पास करा दिया गया जिसकी भी जाँच की मांग करने की बात की जा रही है और जितना भी आवास निर्माण हुआ है उसमे जो मजदूरी भुकतान हुआ है उसकी भी जाँच होनी चाहिए की ये सारा मजदूरी भुकतान गया किसको है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button