CG- भरोसे का कत्ल! फर्जी प्रमाण पत्र और हस्ताक्षर से भाई ने भाई को लगाया इतने लाख का चूना…..

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और कूटरचित हस्ताक्षर के जरिए दुकान बेचने का मामला सामने आया है। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने ही भाई के नाम से फर्जी लेटरपैड तैयार किया और अनापत्ति प्रमाण पत्र पर कूटरचित हस्ताक्षर किए। इसी फर्जीवाड़े के आधार पर दुकान बेचने का आरोप है।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, प्रार्थी साजिद खान द्वारा थाना सुपेला में लिखित शिकायत पेश किया कि आरोपी संजय चौहान ने अपने भाई अजय चौहान के नाम से फर्जी लेटरपैड तैयार कर अनापत्ति प्रमाण पत्र पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए। चौहान प्लाजा स्थित दुकान क्रमांक 110 एवं 111 का विक्रय कर प्रार्थी से 28 लाख रुपये लिया था।
शिकायत की जांच के दौरान प्राप्त आवेदन व दस्तावेजों के परीक्षण में पाया गया कि संबंधित दुकानों के क्रय-विक्रय पर 8 मार्च 2001 को उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा रोक लगाया गया था। दुकानों के विक्रय के लिए अजय चौहान का अनापत्ति प्रमाण पत्र आवश्यक होने के संबंध में प्राप्त दस्तावेजों की जांच की गई।
फर्जी लेटरपैड तैयार कर कूटरचित हस्ताक्षर
जांच में आरोपी द्वारा अपने भाई के नाम से फर्जी लेटरपैड तैयार कर कूटरचित हस्ताक्षर के आधार पर 23 अक्टूबर 2019 को दुकानों का विक्रय करने तथा प्रार्थी से अलग-अलग किश्तों में 28 लाख लिया गया। प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर धारा 420 एवं 468 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कार्रवाई की गई और विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा गया।
अपराध करने का तरीका
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने अपने भाई के नाम से फर्जी लेटरपैड तैयार कर अनापत्ति प्रमाण पत्र पर दुकानों का विक्रय कर 28 लाख रुपये प्राप्त किए।
आरोपी का नाम
1. संजय चौहान, उम्र 47 वर्ष, निवासी शास्त्री नगर, भिलाई, थाना वैशाली नगर, जिला दुर्ग।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री से पूर्व स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों, अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं न्यायालयीन प्रतिबंधों की विधिवत जांच अवश्य करें। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या कूटरचित दस्तावेजों की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। आर्थिक अपराध एवं धोखाधड़ी के मामलों में प्राप्त शिकायतों की जांच कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



