छत्तीसगढ़

CG – नौनिहालों के भविष्य पर 'लापरवाही का ताला': बाघनपाल के आश्रम में बच्चों से कराई जा रही मजदूरी, घर पर आराम फरमा रहे अधीक्षक !…

नौनिहालों के भविष्य पर ‘लापरवाही का ताला’: बाघनपाल के आश्रम में बच्चों से कराई जा रही मजदूरी, घर पर आराम फरमा रहे अधीक्षक !

स्त्रोत – राजा ध्रुव

बस्तर/ लोहंडीगुड़ा। सरकार की ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ और ‘बाल श्रम निषेध’ जैसी बड़ी-बड़ी योजनाएं लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के आदिवासी विकास शाखा के अंतर्गत आने वाले आश्रमों में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जो मासूम बच्चे यहाँ अपने हाथों में कलम थामने, पढ़ाई करने और अपना भविष्य संवारने आए थे, उनके हाथों में हॉस्टल प्रबंधन ने भारी-भरकम सीढ़ियां थमा दी हैं।

​जब हमारी टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर देखा बाघनपाल आश्रम से तस्वीरें सामने आईं, वे किसी भी संवेदनशील इंसान को विचलित कर सकती हैं।

बाघनपाल आश्रम की सामने आई तस्वीर

साफ देखा जा सकता है कि कैसे स्कूल यूनिफॉर्म पहने छोटे-छोटे मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर भारी सीढ़ी उठा रहे हैं और उसे छत पर चढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

​सवाल यह उठता है कि क्या इन बच्चों को यहाँ पढ़ाने के लिए लाया गया है या हॉस्टल का काम करवाने के लिए ? अगर सीढ़ी से गिरकर या किसी और वजह से इन मासूमों के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

15 जून से खुला स्कूल, 23 जून तक गायब हैं बच्चे; मेस की व्यवस्था भी ठप

छत्तीसगढ़ में 15 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। आज 23 जून हो चुकी है, यानी लगभग 8 दिन बीत जाने के बाद भी तारा गांव, गड़दा, साडारा, चंदनपुर, ककनार, चदेला, महिमा, के आश्रमो में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर है। कई हॉस्टलों में आज भी ताले लटके हैं, तो कहीं सन्नाटा पसरा है। जो इक्का-दुक्का बच्चे पहुंचे भी हैं, उनके लिए मेस (भोजन) की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। उन्हें सिर्फ दाल-चावल खिलाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। क्या प्रशासन के पास इन आदिवासी बच्चों को पौष्टिक भोजन देने का बजट नहीं है?

अधीक्षक घर पर कर रहे आराम, फोन करने पर बनाते हैं सरकारी कार्य का बहाना

​इस पूरी बदहाली के सबसे बड़े जिम्मेदार आश्रम के अधीक्षक हैं, जो अपनी ड्यूटी से पूरी तरह नदारद हैं। निरीक्षण के दौरान अधीक्षक महोदय हॉस्टल से गायब मिले और अपने घर पर आराम फरमा रहे हैं। जब मीडिया द्वारा इन्हें फोन कर अव्यवस्थाओं पर सवाल किया जाता है, तो ये अपनी गलती मानने के बजाय सरकार की कागजी योजनाओं का हवाला देकर और नई-नई कहानियां सुनाकर गुमराह करने की कोशिश करते हैं।

हॉस्टल में पसरी गंदगी, बेड और गद्दों का अतापता नहीं

​सत्र शुरू होने से पहले जिन छात्रावासों की साफ-सफाई और मरम्मत हो जानी चाहिए थी, वहाँ आज गंदगी का अंबार लगा है। कमरों में न तो बच्चों के सोने के लिए पलंग (बेड) की सही व्यवस्था है और न ही गद्दों का कोई ठिकाना है। पूरी तैयारी के बिना ही कागजों पर हॉस्टल खोल दिए गए हैं।

प्रशासन से सीधे सवाल :

सवाल नंबर 1: कैमरे में कैद हुई बच्चों से मजदूरी कराने की इस गंभीर लापरवाही पर दोषी अधीक्षक को तत्काल निलंबित करे ?

सवाल नंबर 2: 8 दिन बीत जाने के बाद भी आदिवासी विकास शाखा के जिम्मेदार अधिकारियों ने हॉस्टलों का सुध क्यों नहीं लिया?

सवाल नंबर 3: बच्चों की सुरक्षा और उनके मीनू के अनुसार भोजन (मेस) की व्यवस्था कब तक दुरुस्त होगी?

छात्रावासों की यह बदहाली जिला प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग के दावों पर एक बड़ा तमाचा है। अब देखना होगा कि इस खबर और सबूतों के सामने आने के बाद कलेक्टर और जिम्मेदार उच्च अधिकारी क्या एक्शन लेते हैं।

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