छत्तीसगढ़

CG News- रिटायर कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: बिना जांच ग्रेच्युटी से कटौती पर रोक, हाई कोर्ट ने वसूली गई राशि लौटाने का दिया आदेश…..

बिलासपुर। रिटायर्ड कर्मचारी की ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से राशि की कटौती करने के मामले में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच किए बिना सेवानिवृत्ति लाभों से की गई वसूली को कानून की नजर में बरकरार नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा जारी कटौती आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने निगम को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर काटी गई पूरी राशि याचिकाकर्ता को वापस करें।

पढ़िए क्या है मामला?

याचिकाकर्ता रामेश्वर प्रसाद शर्मा बीज एवं कृषि विकास निगम में सहायक प्रबंधक के पद से 28 फरवरी 2023 को सेवानिवृत्त हुए थे। वे पूर्व में जगदलपुर में जिला प्रबंधक के रूप में पदस्थ पर काम कर रहे थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान किया जाना था। निगम प्रबंधन ने 20 दिसंबर 2023 को एकतरफा आदेश जारी कर ग्रेच्युटी की राशि से कटौती कर दी। निगम का आरोप था कि जगदलपुर में पदस्थापना के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एक निजी कंपनी को निर्धारित राशि से अधिक भुगतान किया गया था। कटौती के बाद याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी की मूल राशि में से महज 3,71,264 रुपये का भुगतान किया गया।

कटौती आदेश को हाई कोर्ट में दी चुनौती

कटौती आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता राजेश कुमार केशरीवानी ने कहा, निगम ने राशि की वसूली करने से पहले याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया। न ही उनका पक्ष जानने के लिए सुनवाई का अवसर दिया, न ही आरोपों की जांच के लिए कोई विभागीय जांच कराई गई। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी के अर्जित लाभ से इस तरह एकतरफा कटौती करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

निगम ने भी स्वीकार की प्रक्रिया की कमी

सुनवाई के दौरान निगम की ओर से अधिवक्ता पंकज अग्रवाल ने कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि राशि की रिकवरी से पहले याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था। उन्हें सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया और उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच आयोजित नहीं की गई थी।

हाई कोर्ट ने माना कार्रवाई मनमानी

हाई कोर्ट ने कहा, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों से रिकवरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने निगम द्वारा जारी 20 दिसंबर 2023 के कटौती आदेश को निरस्त कर दिया है। आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी से काटी गई पूरी राशि वापस करने का निर्देश दिया है।

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