छत्तीसगढ़

CG – एनएसएस के जिला समन्वयक मनोज सिंह नें विश्व पर्यावरण दिवस पर मल्हार स्थित बद्री प्रसाद देवांगन स्कूल में किया वृक्षारोपण पढ़े पूरी ख़बर

मल्हार//संयुक्त राष्ट्र के आव्हान पर प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और इसी दिन मल्हार स्थित बद्री प्रसाद देवांगन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी राष्ट्रीय सेवा योजना जिला समन्वयक डॉ. मनोज सिंह और मेम नें स्कूल परिसर में वृक्षारोपण किया और पूर्व में किए लगाए गए वृक्षों का भी मुआयना किया गया इनके साथ स्कूल के एनएसएस प्रभारी करुणेश नापित शिक्षक भी उपस्थित रहें बताते चलें की विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाते हुए राजनैतिक चेतना जागृत करने और आम जनता को प्रेरित करना है।

डॉ. मनोज सिंह नें वृक्षारोपण के फायदे गिनाते हुए बताया कि साफ हवा, बेहतर सांस पेड़ 1 साल में 22 किलो CO₂ सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। नीम, पीपल, बरगद जैसे पेड़ हवा से धूल, धुआं और जहरीली गैसें खींच लेते हैं। एक बड़ा पेड़ 4 लोगों के लिए सालभर की ऑक्सीजन देता है।

पेड़ शहर का तापमान 2°C से 8°C तक कम कर देते हैं। इनकी छाया और वाष्पोत्सर्जन से AC का खर्च 30% तक घट जाता है। गर्मियों में जंगल जैसे इलाकों में यही राहत सबसे ज्यादा जरूरी है। पेड़ की जड़ें बारिश का पानी जमीन में रोकती हैं। इससे भूजल स्तर बढ़ता है और बाढ़ का खतरा कम होता है। 1 वयस्क पेड़ साल में 2.5 लाख लीटर पानी जमीन में उतार सकता है जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं। नदी किनारे जैसे रेत खनन वाले इलाकों में पेड़ कटाव रोकते हैं। खेत की मेड़ पर पेड़ लगाने से उपजाऊ मिट्टी बहने से बचती है।

एक पेड़ पर 500+ तरह के कीट, पक्षी, गिलहरी रहते हैं। शहद की मक्खी, तितली, गौरैया सबको पेड़ चाहिए। जैव विविधता तभी बचेगी जब पेड़ बचेंगे घनी पत्तियों वाले पेड़ सड़क का 60% तक शोर सोख लेते हैं। धूल के कण भी पत्तियों पर चिपक जाते हैं। इसीलिए हाईवे किनारे पेड़ जरूरी हैं।

हरियाली देखने से तनाव, BP और एंग्जायटी कम होती है। जापान में तो ‘फॉरेस्ट बाथिंग’ थेरेपी है। पेड़ों के बीच 20 मिनट टहलना मूड ठीक कर देता है फल, फूल, पत्ते, लकड़ी, औषधि – पेड़ से सीधी कमाई। सागौन, बांस, महुआ, आंवला, आम लगाने वाले किसान लाखों कमाते हैं। मनरेगा में भी वृक्षारोपण से मजदूरी मिलती है।

ज्यादा पेड़ ज्यादा बादल। पेड़ नमी छोड़ते हैं जिससे लोकल बारिश का चक्र बनता है। छत्तीसगढ़ में जंगल कटने से बारिश पैटर्न बिगड़ा है आज लगाया पीपल 100 साल तक ऑक्सीजन देगा। आपका एक पेड़ आपके नाती-पोतों को छाया,फल और साफ हवा देगा। यही असली विरासत है।

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