छत्तीसगढ़

CG – चाँद पर भारत पर छत्तीसगढ़ का 21 गाँव आजादी के 79 साल बाद भी अँधेरे में बिजली सड़क का इंतजार मोमबत्ती सहारा ना स्वास्थ्य सुविधा ना बच्चों की पढ़ाई जानें दुर्दशा की पूरी कहानी पढ़े पूरी ख़बर

बलौदाबाजार भाटापारा//हम 21वी सदी मे प्रवेश कर चुके है और कितना आगे बढ़ गए है इसका अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि जहाँ कोई भी देश नहीं पहुंच सका चाँद के उस हिस्से मे सिर्फ और सिर्फ भारत पहुंचा किन्तु भारत देश के ही छत्तीसगढ़ राज्य जो बिजली उत्पादन मे टॉप पर है इसी छत्तीसगढ़ का एक जिला बलौदा बाजार है और यहाँ के 21 गाँव आज भी आज़ादी के 79 साल बीत जानें के उपरांत अंधेरे जीवन जिनें कों मज़बूर है 21 गाँव के हजारों रहवासी बिजली और सड़क का इंतजार कर रहें है। देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सोनाखान ब्लॉक अंतर्गत बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 21 गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां न बिजली है,न पक्की सड़क। ग्रामीणों का आरोप है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी वे विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं।

बारनवापारा के घने जंगलों के बीच बसे इन 21 गांवों में सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता है। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। मोबाइल चार्ज करने से लेकर रोजमर्रा के काम तक ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र होने के कारण रात में जंगली जानवरों और जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। अंधेरे की वजह से कई बार हादसे और जनहानि की घटनाएं यहाँ आम बात है सिर्फ बिजली ही नहीं, सड़क की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। बारिश के मौसम में कच्चे रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं और गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है।

स्थिति इतनी गंभीर है कि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को आज भी खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता है। कई किलोमीटर पैदल चलकर मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली और सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की जनता आंदोलन,धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम जैसे लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद वीर नारायण सिंह की धरती पर बसे इन गांवों को अब और उपेक्षित नहीं रखा जाना चाहिए।

एक तरफ सरकार गांव-गांव विकास पहुंचाने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन बारनवापारा वनांचल के ये 21 गांव आज भी बिजली और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी इन गांवों तक विकास की रोशनी क्यों नहीं पहुंच रही? वही ग्रामीणों का का कहना है बेटियाँ अब बड़ी हो चुकी है शादी के लिए रिस्ते नही आ रहे हैं ऐसे में क्या इन बेटियों कों कभी जीवन साथी नहीं मिल पाएगी,और लड़को को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रहा है। आखिर इनकी समस्या कब खत्म होंगी।

21 गांव अंधेरे में, विकास के दावे रोशनी तलाशते बारनवापारा के वनांचल में सड़क-बिजली का संकट डिजिटल इंडिया के दौर में बिना बिजली के जी रहे 21 गांव बीमार को खाट पर, बच्चे लालटेन में पढ़ने को मजबूर आज़ादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित वनांचल। इन सभी समस्याओं की जानकारी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणों के द्वारा प्रेस वार्ता रखकर दी गई। इस मौके पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

21 ग्रामों में बिजली एवं सड़क नहीं होने से पढ़ने वाले बच्चों को लालटेन, मिट्टी के धीरे से पढ़ाई करनी पड़ती है और सड़क नहीं होने से बीमारों को खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता है। बिजली एवं पक्की सड़क नहीं होने से शादी के उम्र के लड़के, लड़कियों को वर वधु नहीं मिल पा रहा है।

इनकी समस्या देख कर ऐसा लगता है जैसे ये सभी गरीब गाँव वाले आदिमानव कि जिंदगी जिनें मज़बूर है एक समय था ज़ब इंसान जंगल मे ही रहा बसा करता था और उनको बिजली सड़क गाड़ियों और अन्य सुख सुविधाओं से कोई लेना देना नहीं था पर अब बिजली सड़क पानी लोंगो कि मुलभुत अधिकार बन चुके है ऐसे मे देश और राज्य इतनी तरक्की कर भी अपने नागरिकों तक ये सुविधा नहीं पहुंचा पा रही तो जरूर सोचने वाली बात है।

आदिवासी सीएम से भारी उम्मीद…

इन 21 गाँव के हजारों ग्रामीणों कों छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से बड़ी उम्मीद है उनको लगता है की एक सामान्य आदिवासी परिवार से आने वाले सीएम उनकी समस्या कों समझ सकते है और दूर भी करेंगे हालांकि देखना होगा कब तक ये बात छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णु देव साय तक पहुँचती है की उनके राज्य मे आज भी 21 गाँव के बच्चे लाल टेन मे पढ़ने कों मज़बूर है ना स्वास्थ्य सुविधा ना बिजली और ना ही सडक और कब इनकी ये अत्यंत बड़ी समस्या दूर की जाती है।

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