CG – भ्रष्टाचारियों कों संरक्षण मुनगाडीह पंचायत में हुए गोलमाल के खेल में पंचायत उप संचालक का जांच आदेश बेअसर पाली जनपद अधिकारी कर रहे अवहेलना पढ़े पूरी ख़बर
कोरबा//जनपद पंचायत पाली के ग्राम पंचायत मुनगाडीह में विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा जारी 15वें वित्त की राशि मे सरपंच- सचिव द्वारा मिलकर फर्जी बिलों के जरिये लाखों के भ्रष्ट्राचार को अंजाम दिया गया है। जिनमे मिडिल स्कूल में शौचालय मरम्मत, प्राथमिक शाला अतिरिक्त कक्ष मरम्मत, नाली सफाई कार्य, नाली मरम्मत, पाइप लाइन विस्तार कार्य और पेयजल स्रोतों के रखरखाव व नए पेयजल स्रोतों पर कागजों में काम बताकर सरकारी धन का जमकर वारा- न्यारा किया। सरपंच- सचिव द्वारा किये गए भ्रष्ट्राचार के जिस खेल को खबरों के माध्यम से उजागर किया गया, जिसे जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग ने गंभीरता से संज्ञान में लिया और पंचायत उप संचालक को जांच के निर्देश दिए। जिसके परिपालन में उप संचालक ने पाली जनपद सीईओ मोहनीश देवांगन को दिनांक 14 मई 2025 को आदेश क्र.- 2721/ पंचा./ शिका./ 2026 के तहत जांच ज्ञापन प्राप्ति के 03 दिवस के भीतर जांचकर जांच प्रतिवेदन अभिमत सहित मांगा है।
किंतु मामले में जांच टीम अबतक जांच के लिए पंचायत नही पहुँच पायी है। इससे प्रतीत होता है कि पंचायत उप संचालक के जांच आदेश को जनपद अधिकारी ठेंगा दिखाने में लगे है। विभागीय सूत्रों से जो जानकारी प्राप्त हुई है उसके मुताबित पंचायत में हुए वित्तीय अनियमितताओं की जांच के स्पष्ट आदेश को जनपद अधिकारियों द्वारा अनदेखा किया जा रहा है और दोषी सरपंच- सचिव को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देने की बातें भी सामने आ रही है। जांच के लिए तय की गई समय सीमा पर जांच टीम का पंचायत में न जाना अवमानना की श्रेणी में आता है तथा यह सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और भ्रष्ट्राचार को बढ़ावा देना है।
जिला सीईओ के निर्देश पर पंचायत उप संचालक द्वारा भ्रष्ट्राचार के आरोपों पर पाली जनपद सीईओ मोहनीश देवांगन को जांच टीम गठित कर 3 दिन की समय सीमा तय की गई थी। जनपद सीईओ द्वारा तय समय सीमा बीत जाने पर भी जांच के लिए टीम न भेजना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। बता दें कि वरिष्ठ अधिकारियों के स्पष्ट आदेश का पालन न करने वाले अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का नियम है, ऐसी स्थिति में जिला स्तर पर संबंधित जनपद अधिकारी को क्या कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा? बहरहाल जिला अधिकारियों के आदेश पर पंचायत के भ्रष्ट्राचार की जांच कर रिपोर्ट 03 दिन में देनी थी, किन्तु निचले स्तर के अधिकारी अपनी मनमानी करते हुए आदेश का उल्लंघन करने में लगे है। जिसे लेकर मुनगाडीह के ग्रामीण कलेक्टर के पास जाने का मन बना लिए है।



