CG- शादी के मंडप में हुआ कुछ ऐसा, दुल्हन से शादी से किया इंकार, बिना दुल्हन लिए वापस लौटी बारात, दुल्हन ने जो बताया, उड़ गए सबके होश…..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से 25 किलोमीटर दूर तखतपुर में एक ऐसी घटना घटी जिसे सुनकर आप अवाक तो रह ही जाएंगे। शादी के मंडप से दुल्हन उठी और दुल्हे के साथ सात फेरे लेने से साफ इंकार कर दिया। वजह जानकर, जब घर वाले और बाराती चौक गए तब तो आप भी सन्न ही रह जाएंगे।
तखतपुर में छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के एक गांव से बारात आई थी। बारातियों का दुल्हन पक्ष की ओर से जोरदार स्वागत सत्कार किया गया। बारात की परघनी भी निकली। डीजे की धुन पर बारातियों की धमाल देखते ही बनती थी। शादी की तैयारी भी मंडप में शुरू हो चुकी थी। वर वधु पक्ष के चुनिंदा लोग मंडप पर बैठकर रस्में पूरा करा रहे थे। सब-कुछ ठीक चल रहा था। रस्में पूरा हो रही थी, अब बारी थी दुल्हे द्वारा दुल्हन की मांग भरने की।
जैसे ही दुल्हा अपने जगह से उठकर दुल्हन की मांग पर सिंदूर भरने जा रहा था, झूंझट में बैठी दुल्हन का हाथ निकला और दूल्हे के हाथ को पकड़ लिया, मांग भरने से मना करती हुई, शादी से इंकार कर दी। इस घटना से विवाह मंडप से लेकर शादी समारोह में हड़कंप मच गया। मेजबान और मेहमानों को तो कुछ कहते ही नहीं बन रहा था। सभी सोचने लगे, आखिर क्या हुआ, ऐसा क्यों हुआ। दुल्हन से शादी से इंकार ऐनवक्त पर क्यों किया।
माता पिता से लेकर परिजन युवती को अपना निर्णय बदलने समझाने लगे, बदनामी होने और मेहमानों के अपमान का वास्ता भी दिया, युवती ने कहा, इससे नहीं। युवती ने परिजनों को जो कुछ बताया, सुनकर उनके तो होश ही उड़ गए। युवती ने बताया, उसे शादी के मंडप में पता चला, जिसे मेडिकल लाइन में काम करने वाला बता रहे थे, ऐसा नहीं, वह मानसिक रोगी है। युवती फिर बोली, पाणिग्रहण संस्कार के दौरान ही दूल्हे की सनक सामने आ गई और मंडप में ही दबी जुबान में “देख लेने और जीवन बर्बाद कर देने” की सीधी धमकी दे रहा था। युवती फिर बोली, अगर मैं चुप रह जाती, तो पूरी जिंदगी नरक हो जाती। जब वह मंडप में ही मुझे धमकी दे रहा है, तो शादी के बाद मेरा क्या हश्र करता? अपनी जिंदगी तबाह करने से बेहतर था कि मैं वहीं पर आवाज उठाऊं।
दुल्हन के इस फैसले के बाद दोनों पक्ष की ओर से समझाइश की कोशिशें चलती रही। युवती ने अपना फैसला बदलने से साफतौर पर इंकार दिया। आखिरकार बारात बिना दुल्हन के सुबह बैरंग लौट गई।



