CG:बेमेतरा जिले से खास खबर…नवाचारी शिक्षक के रूप में जानी जाती है व्हीलचेयर पर शिक्षा की अलख जगा रही 75% दिव्यांग प्रधानपाठक….दिव्यांगता को पछाड़ा बहुमुखी प्रतिभा की धनी हिम कल्याणी सिन्हा….हिम कल्याणी सिन्हा ने अपने साहस और हौसलों से भरी उड़ान .. देखिए पूरा खबर Nayabharat. Live में
साजा विधानसभा क्षेत्र अकोला में पदस्थ शिक्षिका हिमकल्याणी सिन्हा


संजू जैन जिला संवाददाता बेमेतरा Nayabharat. Live 7000885784
बेमेतरा: बेमेतरा जिले के साजा ब्लाक के शासकीय प्राथमिक शाला अकोला में प्रधानपाठक के पद पर कार्य कर रही जिला बेमेतरा की नवाचारी शिक्षिका हिमकल्याणी सिन्हा शारीरिक रूप से 75 फीसदी दिव्यांग है, बावजूद इसके कक्षा में बच्चों के साथ इनका काम 100 प्रतिशत है मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी हिम कल्याणी तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी है दोनों भाई छोटे है, हिमकल्याणी के बचपन से ही दोनों पैर पोलियो से ग्रसित है, उन्होंने कभी अपने आपको चलते हुए नहीं देखी, घुटनो के बल चलती पर उनका मन दूसरे बच्चों को देखकर ललचाता था की काश मैं भी चल पाती, बच्चों को खेलते देख सोचती की काश मैं भी खेल पाती दौड़ पाती पर ये संभव नहीं था, हिमकल्याणी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी माता- पिता उनकी पढ़ाई की चिंता करने लगे पर प्रतिदिन स्कूल पहुंचाने की समस्या थी इसी कारण सही उम्र में स्कूल में दाखिला भी नहीं ले पायी, ऊपर से लोगों के ताने की ये स्कूल नहीं जा पायेगी, पढ़ नहीं पायेगी, माता पिताजी भी उस समय सोचने लगे की आखिर रोज रोज कैसे स्कूल जा पायेगी उससे अच्छा है घर में ही रहे फिर इसी बीच एक दिन एक मास्टरजी बच्चों के दाखिला सर्वें के लिए गली में आये हिमकल्याणी अपनी दादी के साथ बाहर में बैठी थी मास्टर जी स्कूल नहीं जाने का कारण पूछा, दादी मास्टर जी को समस्या से अवगत करायी, मास्टर जी दादी को समझाते हुए हिमकल्याणी का नाम गली में ही लिख लिए, हिमकल्याणी स्कूल जाने के नाम से बहुत ख़ुश हुई क्योंकि अब उनके साथ बहुत से बच्चें होंगे दूसरे दिन पिताजी साईकिल में बिठाकर हिमकल्याणी को स्कूल छोड़ने गये, मास्टर जी उन्हें बहुत हौसला दिए जिसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ा, अब तो पिताजी नियम ही बना लिए की किसी भी तरह बेटी को स्कूल पहुँचाना है इसके लिए वे बाकी काम या कही आना जाना को भी छोड़ देते थे, क्योंकि बेटी को 10 बजे स्कूल छोड़ना और 4 बजे स्कूल से घर लाना था, पिताजी पूरा प्रयास करते, कभी अतिआवश्क कार्य से बाहर जाना होता तो स्कूल के बड़ी लड़कियां उसे सहारा देकर स्कूल ले जाती उनको भी ऐसा करके अच्छा लगता था, हिमकल्याणी बच्चों के साथ घुल मिल गयी थी जैसे- तैसे हिमकल्याणी 12वीं तक की पढ़ाई अच्छे नंबरों से पूरी की, पर ये सफर उनके लिए बहुत संघर्ष भरा रहा, माँ का भी सहयोग मिला, दोनों भाई छोटे थे इसलिए वे ज्यादा मदद नहीं कर पाते थे, घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी, भागवत राम सिन्हा (पिताजी) छोटे से दुकान में टेलरिंग का काम कर तीन भाई बहनों को पढ़ाये लिखाये, पर लोगों की नजरिया बदल पाना आसान नहीं था, वे समय समय पर पिताजी को बोलते रहते थे की ये अब आगे कुछ नहीं कर पायेगी, बोरा जैसे लादकर इसे कहा-कहा ले जाओगे, पिताजी हार नहीं माने और आगे की पढ़ाई के साथ ही विभिन्न विकेन्सि आदि में फॉर्म भरना जारी रखे इधर हिमकल्याणी भी पिताजी के साथ टेलरिंग का काम सीखने लगी जिससे सरकारी नौकरी न मिलने पर वह स्वयं से कुछ कर सके काफ़ी हद तक वह टेलरिंग का का सीख गयी फिर एक दिन वह समय आया जो जीवन खुशियाँ भर दी।
*सपनों में पंख लगें* 29/06/2007 को शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के पद पर शासकीय प्राथमिक शाला सैगोना में नियुक्त हुई, परिवार में सभी बहुत ख़ुश हुए, ऐसे लग रहा था जैसे जीने के लिए रास्ते मिल गये हिमकल्याणी के जीवन में ये सबसे खुशियों भरा दिन था, जिसे शब्दों में बया कर पाना शायद मुश्किल है, यहाँ से शुरू होती है उनकी शिक्षकीय यात्रा

*शिक्षा के क्षेत्र में योगदान*
हिमकल्याणी और संघर्ष का गहरा नाता था, स्कूल जाने के लिए प्रतिदिन का 14 किलोमीटर का सफर था, और घर में साईकिल के अलावा और क़ोई साधन नहीं था, पिताजी रोज साईकिल से सैगोना स्कूल छोड़ने जाते और शाम को लेने जाते, भाई थोड़े बड़े हो गये थे तो थोड़ी उनसे भी सहयोग मिल जाता था, इस तरह कुछ वर्ष चलते रहा फिर पिताजी सेकंड हैंड मोटरसाईकिल ख़रीदे जिससे स्कूल जाने में आसानी हुई, हिमकल्याणी कैसे भी परिस्थिति में रही पर कभी भी अपनी परिस्थिति को बच्चों के पढ़ाई के बीच बाधा नहीं बनने दी, शासन की समस्त योजनाओं को बहुत लगन रुचि एवं आत्मविश्वास से करती है, नवाचारी शिक्षिका के रूप में पहचान बना चुकि हिमकल्याणी सिन्हा शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार की कबाड़ से जुगाड़ कर उपयोगहीन वस्तुओं से बहुत कम लागत में 150 से अधिक सहायक सामग्री और खिलौना निर्माण के साथ स्वयं से खिलौना कार्नर बनावाकर शाला को प्रदान की है जिसका नियमित उपयोग कक्षा में होता है, आर्गमेटेड रियालिटी से बच्चों को आभासी दुनिया से परिचय करायी, टॉकिंग टैड, पॉडकास्ट वीडियो, कैलकुलेटर का उपयोग छोटे बच्चों को डिजिटल पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास की, ओरेगामी क्राफ्ट पीएलसी अंतर्गत हिंदी, गणित, अंग्रेजी, पर्यावरण सम्बंधित बिग बुक निर्माण की है, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करती है, आर्थिक रूप से कमजोर या जिनके माता पिता नहीं, दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई लिखाई में हर सम्भव सहयोग प्रदान करती है, स्वयं गीत, कहानी, कविता की रचना कर बच्चों को पढ़ाती है, हिमकल्याणी विभिन्न त्यौहारों को शाला में बच्चों के साथ मनाती है जिससे बच्चें अपने रीति रिवाज़ परम्परा, संस्कृति से जुड़े रहे, हिमकल्याणी की बच्चों के साथ गतिविधि के 550 तक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड है जिसे कभी भी देखा जा सकता है, 17 वर्ष तक शासकीय प्राथमिक शाला सैगोना में सहायक शिक्षक के पद पर कार्य की उनके पश्चात 16/08/2024 से पदोन्नति लेकर शासकीय प्राथमिक शाला अकोला में प्रधान पाठक के पद पर कार्य कर रही है। हिमकल्याणी सिन्हा अब अपने मॉडिफाई स्कूटी से शाला जाती है और नए स्कूल के लिए प्रतिदिन 20 किलोमीटर की सफर तय करती है, इस बीच स्कूली बच्चों व गाँव के लोगों को अपने स्कूटी में बिठाकर उनके गतंव्य तक छोड़ती है, हिमकल्याणी बच्चों को टाई,बेल्ट, आई कार्ड वितरण की है दोनों शाला मिलाकर अभी तक लगभग 700 बच्चों को लाभ मिला है।

*कोरोना काल में किए गये कार्य*
कोरोना काल के विभीषिका से हम सभी परिचित है, ज़ब लोग घर से बाहर निकल नहीं पाते थे, अपने ही परिवार के लोगों से मिलने में डरते थे उस समय बच्चों की पढ़ाई पूरी तरफ से बाधित हो गयी थी, स्कूल,कॉलेज सब बंद हो गये थे, हिमकल्याणी मन ही मन बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित थी लेकिन क़ोई उपाय नहीं दिख रहा था बच्चों से जुड़ने का तभी एक आदेश जारी किए की शिक्षक स्वैचछिक रूप से समर क्लास ले सकते है, हिमकल्याणी को बच्चों से जुड़ने का रास्ता मिल गया उनके प्रधान पाठक भी क्लास लगाने की अनुमति दें दिए वह तत्काल बच्चों और पालकों से सम्पर्क करना प्रारम्भ की और गाँव के ही माँ शीतला मंदिर प्रांगण में क्लास लगाई सबसे पहले वह बच्चों और गाँव वालों को मास्क और सैनेटाइजर वितरण की सभी गाइडलाईनस का पालन करते हुए कक्षा शुरू की, धीरे धीरे सभी क्लास प्रांगण में आने लगे, गीत, कहानी, कविता, पहेली, साथ ही विषय वस्तु से जोड़कर पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की यहाँ पर हिमकल्याणी का उद्देश्य सिर्फ पढ़ाना नहीं था बल्कि बच्चों के साथ जुड़े रहना था, वह हर परिस्थिति में बच्चों के साथ जुड़कर उनके हालचाल से वाकिफ होना चाहती थी क्योंकि कोरोना के कहर कब किसके ऊपर बरस जाए क़ोई नहीं जानते, ज़ब गाँव में अति कोरोना पीड़ित होने लगे तो बेरीकेट लगा दिए इस बीच हिमकल्याणी बच्चों को ऑनलाइन क्लास में जोड़ने की प्रयास की इसके लिए उन्हें बहुत मेहनत करना पड़ा, छोटे बच्चों को मोबाइल में जोड़ पाना इतना आसान नहीं था पर उनके क्लास में धीरे धीरे बच्चें जुड़ने लगे, गाँव में नेटवर्क की समस्या होने पर खुद को सँभालते हुए छत पर जाती थी इस बीच चोट भी लग जाती थी पर उनका दर्द बच्चों से जुड़ने से कही कम था, डोर टू डोर भी बच्चों से संपर्क करती थी, जिससे पालक भी हिमकल्याणी से जुड़े रहते थे।
धीरे -धीरे दूसरे जिलों के शिक्षकों और बच्चों से भी जुड़ाव होने लगा मोटिवेशन हेतू लगभग 100 से अधिक क्लास आयोजित किए जिसमें हाई स्कूल तक बच्चें जुड़ते थे और आज भी हिमकल्याणी सिन्हा के सम्पर्क में है इसमें शामिल है बेमेतरा, रायगढ़, जांजगीर चांपा, रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, राजनांदगाँव, जिलों के बच्चें जो हिमकल्याणी सिन्हा के साथ जुड़ने के लिए आतुर रहते थे।
*स्वरचित लेख व रचना*
हिमकल्याणी सिन्हा लेखिका और रचनाकार के रूप में भी कार्य करती है उनकी रचना इन किताबों में प्रकाशित है –
दिव्यांगता अधिकार, अवसर और आशा
नारी शक्ति, संवेदनाओं के झरते मोती, पर्यावरण संरक्षण बुक, खूबसूरत लम्हें
*पत्र पत्रिकाओं में स्थान*
बाल पत्रिका किलोल, एफ एल एन बुक,
इसी के साथ खिलौना बुक, शिक्षा के गोठ, चर्चा पत्र, अभ्यास पुस्तिका, एफ एल एन सफल एप्रोच बुक में इनकी रचना, लेख प्रकाशित है, इनके शाला के बच्चों की रचनात्मक लेख, कविता, चित्रकारी को भी बाल पत्रिका किलोल, पत्रिका ब्रेन पावर के टैलेंट विंडो पेज़ एवं विश्वसनीय समाचार पत्रों में स्थान मिला है, बच्चों को समय -समय में पुरस्कृत करती है जिससे बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना जागृत हुआ, बच्चें आगे आकर हर एक कार्यक्रम में भाग लेने लगे,आर्ट क्राफ्ट, ओरेगामी पेपर आर्ट बच्चों को सिखाती रहती है।
*शाला के भौतिक विकास में स्वयं का योगदान*
शासकीय प्राथमिक शाला सैगोना
शिक्षिका स्मार्ट शाला बनाने हेतू 10,000₹ की राशि
कक्षा में टाइल्स लगवाई 17,000₹
खिलौना कार्नर 10,000
तीन ग्रीन मैट 3,000₹
स्मार्ट टी. वी. 12,800₹
*शासकीय प्राथमिक शाला-अकोला*
विशेष आवश्कता वाले प्रसाधन कक्ष
40,000₹
स्मार्ट टी.वी. 16,000₹
शाला में रंगरोगन प्रिंटरिच 45,000₹
*शाला में समुदाय का सहयोग*
हिमकल्याणी के कार्यों से प्रभावित होकर, लिनेस क्लब प्रेरणा के द्वारा बच्चों को 25 नग स्वेटर प्रदान किए, ग्रामीण भी शाला के विकास कार्यों में सहयोग प्रदान कर रहे है ग्राम पंचायत से पानी टंकी, रैम्प निर्माण किए है, वही ग्राम से किशन साहू सभी कक्षा के दरवाजा में स्टील के रेलिंग लगाए है, किचन गार्डन हेतू जितेंद्र वर्मा मिट्टी प्रदान किए, दिनेश देवांगन शाला को ग्रीन मेट, सिंगल मैट, डोर मैट प्रदान किए, एक वर्ष के अंतर्गत शाला में समुदाय से लगभग 9 बार न्योता भोजन का आयोजन किए है।
*पर्यावरण के क्षेत्र में*
वीरान दिख रहे शाला परिसर में अभी तक 60 पौधे रोपित की है जिसमें रुद्राक्ष, लाल चंदन, लौंग, बदाम, अशोक, नारियल, महात्मा, पाम ट्री, ऑक्सीजन ट्री, सनपराश, सर्प ट्री, कदम, केला, कटहल, नीबू, केला जैसे अनेको छायादार, फलदार, फूलदार और औषधियुक्त पेड़ शामिल है, अब शाला परिसर में हरियाली के साथ सुन्दर फूल खिल रहे है।
*सामाजिक क्षेत्र*
कोरोना पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में अपना एक माह का वेतन 29791₹ दान की,
प्रवासी मजदूरों को कोरेन्टाइन सेंटरो में दैनिक जरूरतों की सामग्री प्रदान की, गाँव में भी लॉकडाउन के समय जरूरत परिवारों आवश्यक मदद करती थी, रक्तदान के लिए लोगों को जागरूक करते हुए अभी तक स्वयं 5 बार रक्तदान की है, गंभीर बीमारी से ग्रसित जरूरतमंद के लिए चिकित्सिय सेवा में हमेशा तत्तपर रहती है फोन पे के माध्यम से निरंतर सहयोग करती है, पहाड़ी कोरवा बस्ती के लिए बेटियों की शादी और उनके घर बनाने को लेकर शिक्षकों के टीम के साथ लोगों की मदद की है,
दिव्यांग पतंग पटेल कोरबा जिला से का आर्टिफिशियल हाथ लगाने में मदद की।
दिव्यांग बच्चों के सहयोग के लिए अभी भी शिक्षकों के टीम के साथ जुड़कर कार्य कर रही है।

*उपलब्धि*
वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण, 2021में कोरोना योद्धा, सम्मान, 2022 में उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, 2022 पढ़ई तुहर दुवार में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए सम्मानित हो चुकि है, 2024अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित हुई है, 25/05/2024 रचनाकार सम्मान,
सृजनशील शिक्षक सम्मान
बेस्ट टीचर अवार्ड सीजी पोर्टल में दो बार हमारे नायक में स्थान मिला है। इसी के साथ कई सामाजिक संगठनों से सम्मानित हो चूकि है वर्ष 2024 महामहिम राज्यपाल के हाथों राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हुई है हिमकल्याणी शिक्षादूत पुरस्कार और राज्यपाल पुरस्कार में मिले राशि को शाला के विकास कार्य में खर्च की है।
दिव्यांगता को अपनी ताकत बनाकर हिमकल्याणी सिन्हा अपने कार्यों से अपनी पहचान बनाई है, अब माता पिता सहित गाँव के लोग भी हिमकल्याणी को गर्व भरे नजरो से देखते है और उनकी कार्यों की प्रशंसा करते है।





