छत्तीसगढ़

CG – पचपेड़ी तहसीलदार निलम पिस्दा और लोहर्सी सरपंच अनिल साहू का पटवारी और गाँव के लोंगो की समस्या कों लेकर तिखी बहस का ऑडियो वायरल खड़े हुए कई सवाल जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के मस्तूरी क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारी आम लोंगो से और जनप्रतिनिधियों से तालमेल बैठाने में नाकाम साबित हों रहें है और इसी का एक ताज़ा उदाहरण अब सोशल मिडिया में देखने मिल रहा है ना सिर्फ इसको जमकर शेयर किया जा रहा है बल्कि ये ऑडियो अब सोशल मिडिया के प्लेट फार्म पर जमकर ट्रैंड कर रहा है जिसमे पचपेड़ी तहसीलदार निलम पिस्दा और लोहर्सी सरपंच अनिल साहू पटवारी कों लेकर बात कर रहें है।

लोहर्सी सरपंच अनिल साहू तहसीलदार पचपेड़ी निलम पिस्दा कों कॉल करते है और ग्रामीणों की समस्या बताते हुए कहते है की गांव वाले रोजाना उनके पास आते है और कहते है की पटवारी नहीं आ रहा जिसके वजह से किसान और ग्रामीणों की राजस्व सम्बंधित काम अटका पड़ा है तब तहसीलदार निलम पिस्दा कहते है की आज छुट्टी है और वो उनको कह देंगे वो गाँव आएंगे तब सरपंच लोहर्सी कहते है की आप पटवारी कों सीमांकन में साथ ले जाते है तो पटवारी नहीं आ पाता यह बात पटवारी नें सरपंच अनिल कों बताया है तब तहसीलदार कहते है की सीमांकन रहेगा तो पटवारी कों जाना ही पड़ेगा तब सरपंच अनिल साहू कहता है की आप दूसरे एरिया के सीमांकन में भी लोहर्सी पटवारी कों ले कर जाते हों तब तहसीलदार निलम पिस्दा बोलता है सरपंच आप मेरे काम में क्यों टांग अड़ा रहें हों सरपंच कहता है मुझे ग्रामीण रोज घर आ आ कर परेशान कर रहें है तब तहसीलदार निलम पिस्दा कहते है की मुझे ज्यादा ज्ञान मत दों ये पूरा ऑडियो अब सोशल मिडिया में जमकर दौड़ रहा है जिससे ना सिर्फ मस्तूरी क्षेत्र बदनाम हों रहा है बल्कि अधिकारियो का रवैया भी सवालों कें घेरे में है अब भला लोंगो कों पटवारी से समस्या होंगी तो जनप्रतिनिधि किसके पास जाएंगे? और उनके ऊपर के अधिकारी ही ऐसा बर्ताव करें तो ग्रामीण किसानों के पास क्या रास्ता बचेगा? क्या किसी जनप्रतिनिधि कों अधिकारी से अपने क्षेत्र की समस्या कों बताने का अधिकारी नहीं है? और क्या छोटी छोटी बातों पर तहसीलदार जैसे पड़े पद में बैठे लोंगो कों गुस्सा करना चाहिए क्या ये मामला इतना बड़ा था की तहसीलदार कों इतना गुस्सा आ रहा है? ये तहसीलदार तब क्या करेंगे ज़ब कोई बड़ा समस्या इनकों फेस करना पड़ेगा क्षेत्र में? अब आम लोंगो कों तय करना है और विभाग के राजस्व मंत्री कों तय करना है की यहाँ सरपंच अनिल साहू का कहना सही है या पचपेड़ी तहसीलदार निलम पिस्दा का कौन सही और कौन गलत इसका फैसला विभाग के उच्च अधिकारी और जिले का कलेक्टर संजय अग्रवाल करेंगे क्यों की ये पूरा मामला उनके ही अधिकारी से सम्बंधित है मस्तूरी एसडीएम का भी रुख इसमें देखने वाली होंगी?

मालूम हों की अभी कुछ दिनों पहले ही पचपेड़ी तहसीलदार निलम पिस्दा के क्षेत्र से ही एक पटवारी हरिश्चन्द्र ओगरे पर किसान किशुन रजक नें गंभीर आरोप लगाया था और घुस मांगने का वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमे किसान से 6 हजार का डिमांड पटवारी बहतरा गिधपुरी हरिचंद्र ओगरे नें किया था जिसमे से 1 हजार पटवारी कों किसान नें मस्तूरी तहसील में पहुंच कर दिया था इसकी लिखित शिकायत भी मस्तूरी एसडीएम शिव कुमार कंवर से किया गया है पर अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है जो बताता है की क्षेत्र में भ्रष्ट पटवारीयों कों कैसे सह दिया जा रहा है।

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