छत्तीसगढ़

CG – मस्तूरी की जनता के बीच तेज हों रही लोकल विधायक की मांग जानें आखिर किन बातों से आहत हैँ विधानसभा के मतदाता पढ़े पूरी ख़बर

मस्तूरी//क्यों मस्तूरी विधानसभा में अब एक ऐसे विधायक की मांग तेज हों गई हैँ जो मस्तूरी विधानसभा के ही किसी गाँव में रहें और जनता कों उनसे मिलने के लिए क्षेत्र के गरीब लोंगो कों अपना काम धाम छोड़ कर बिलासपुर दौड़ना ना पड़े और यही रह कर आम लोंगो कों होनें वाली समस्याओं कों समझें और उनकी आवाज कों विधानसभा में उठाए।

दरअसल मस्तूरी क्षेत्र में आम पब्लिक से लेकर किसान गरीब भ्रष्टाचार से त्रस्त हैँ और बिजली पानी और सड़क यहाँ की मूल समस्या हैँ कई मौको पर इन समस्याओं के लिए रोड़ पर भी धरना देना पड़ा हैँ लोंगो का कहना हैँ की जिनको उन्होंने क्षेत्र का नेता चुना वो तो बिलासपुर शहर में चुनाव जीत कर बैठ जाते हैँ और सिर्फ कार्यक्रम में ही विधानसभा के क्षेत्र के गाँव में दिखाई देते हैँ और लोंग अपनी समस्याओं से जूझते रहते हैँ पर गरीब ग्रामीणों का ना कोई अधिकारी सुनता ना उनका चुना हुआ नेता संज्ञान लेता इसलिए अब लोंग इस बार चुनाव में लोकल विधायक चुनने की बात पर जोर दे रहें हैँ।

मस्तूरी में भ्रस्टाचार चरम पर…

बताते चलें की मस्तूरी क्षेत्र में भ्रस्टाचार का जाल फैला हुआ हैँ जिससे लोंग भारी परेशान हैँ चाहे वो अवैध रेत खनन का हों चाहे पटवारी द्वारा घुस खोरी का मामला हों चाहे क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री हों या क्षेत्र में बिजली और लो वोल्टेज की समस्या हों या कमीशन खोरी इन सबको लेकर इस बार जनता में भारी आक्रोश हैँ एक तो उनका नेता उनकी समस्याओं में खड़ा नहीं होता और ज़ब इन मामलों की शिकायत करते भी हैँ तो अधिकारी नहीं सुनते मतलब उनका चुना हुआ नेता उनकी नजर में कमजोर हैँ और तभी मस्तूरी के अधिकारी इसका फायदा उठाते हैँ और किसी कों नहीं सुनते।

इन दों मामलों से समझें की मस्तूरी में आखिर लोंगो में अब लोकल विधायक की मांग क्यों तेज हों रही हैँ पहला मामला कुछ दिनों पहले बहतरा के एक गरीब किसान किशुन रजक से बहतरा गिधपुरी के पटवारी हरिश्चन्द्र ओगरे नें मस्तूरी तहसील बुला कर एक छोटे कार्य के लिए 6 हजार घुस मांगा और उसने एक हजार दिया और बाकी काम होनें के बाद देनें बोला जिसका वीडियो जमकर वायरल भी हुआ था। दूसरा कुछ दिनों पहले पचपेड़ी तहसीलदार निलम पिस्दा और लोहर्सी सरपंच अनिल साहू का तिखी बहस का ऑडियो जमकर वायरल हुआ दोनों एक दूसरे कों यह समझाने में लगे थे की कौन सही हैँ और कौन ज्यादा पावर फूल हैँ इसकी भी बिलासपुर कलेक्टर से शिकायत हुआ पर क्या कार्रवाई हुई ये किसी कों नहीं पता इससे पहले किसान किशुन रजक नें भी पटवारी हरिश्चन्द्र ओगरे की मस्तूरी एसडीएम शिव कुमार कंवर से से लिखित शिकायत किया था पर उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई मतलब मस्तूरी में पब्लिक कों अधिकारी सुनने वाले नहीं हैँ ना ही जनप्रतिनिधि कलेक्टर से शिकायत करते हैँ तो कोई कार्रवाई होती कार्रवाई तो छोड़ दे जाँच तक नहीं होती ना ही इसमें क्षेत्र के नेता का गरीब लोंगो कों समर्थन मिलता शायद यही कारण हैँ की अब मस्तूरी में एक लोकल विधायक की जरुरत महसूस की जा रही हैँ और इस बार लोंग बड़े सोंच समझकर वोट करने की बात कह रहें हैँ देखना होगा आम पब्लिक का गुस्सा किस पार्टी कों कितना और किस प्रत्याशी कों नुकसान पंहुचाता हैँ?

लोकल विधायक का मतलब आम तौर पर आपके विधानसभा क्षेत्र का MLA होता है, जो इलाके की समस्याएँ उठाता है, विकास कार्यों पर निगरानी रखता है, और सरकारी योजनाओं के लिए दबाव बनाता है विधायक सड़क नाली बिजली पानी स्कूल अस्पताल जैसी स्थानीय समस्याओं को विधानसभा और सरकार तक पहुँचाने में मदद करता है इलाके में विकास कामों के लिए विधायक निधि स्थानीय अनुशंसा का उपयोग हो सकता है, जिससे छोटे-बड़े कार्य आगे बढ़ते हैं जनता की शिकायतों के समाधान, सरकारी दफ्तरों में फॉलो-अप,और प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बनाने में विधायक की भूमिका होती है।

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