CG – डीएमएफ फंड के 30.85 लाख से नवनिर्मित प्राथमिक माध्यमिक शाला भवन के घटिया निर्माण से बच्चों की जान दांव पर…! गुणवत्ताहीन मटेरियल इस्तेमाल से हल्की बारिश में भवनों के छत से रिसाव एसईसीएल ब्लास्टिंग से दरकने लगी हैं दीवारें पढ़े पूरी ख़बर
0 हादसे की आशंका से दहशत में पालक.
0 जिला प्रशासन से तकनीकी टीम भेजकर दोनों भवनों की गुणवत्ता जांच कराए जाने मांग.
कोरबा//जिले के पाली विकासखण्ड अंतर्गत एसईसीएल के सराईपाली खदान प्रभावित ग्राम पंचायत बुड़बुड़ द्वारा नवनिर्मित ये शाला भवनें भले ही बाहर से चकाचक व मजबूती लिए खड़ा हो, लेकिन भीतर से इनके नीव एवं ढांचे बेहद कमजोर तैयार किया गया है। बच्चों की सुरक्षा को बलाए- ताक पर रखकर जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद के 30.85 लाख की स्वीकृति से बने उक्त प्राथमिक और माध्यमिक शाला के नए भवन में भ्रष्ट्राचार स्पष्ट झलक रहा है, जिसने यहां पढ़ने वाले बच्चों की जान को सांसत में डाल दिया है।
एसईसीएल के सराईपाली परियोजना अंतर्गत ग्राम बुड़बुड़ में कोयला खदान का संचालन हो रहा है, जहां कोयला खनन के तहत एसईसीएल द्वारा गांव के पुराने प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल को डिस्मेंटल किया गया। इसके बदले एसईसीएल के आवासीय कालोनी के समीप जिला खनिज न्यास मद से 15 लाख से नवीन प्राथमिक शाला और 15.85 लाख से मिडिल स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति जिला प्रशासन से मिली, जिसके निर्माण वर्ष 2025- 26 में ग्राम पंचायत बुड़बुड़ को एजेंसी बनाकर कार्य कराया गया। लेकिन निर्माण एजेंसी सरपंच-सचिव ने अपनी जेबें भरने के चक्कर मे सारे नियम- कायदे को दरकिनार कर दिया और स्टीमेट के विपरीत काम कराकर लाखों की राशि मे जमकर वारा- न्यारा किया। डीएमएफ का पैसा, जो खनन प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए है,उसे गुणवत्ताहीन निर्माण में बर्बाद कर दिया गया।
सरपंच-सचिव पर ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए मौके पे कार्य स्थिति से अवगत कराया, जिसके मुताबित नियमानुसार भवन निर्माण में फ्लाईऐश ईंट का उपयोग होना था, लेकिन अधिकतर लाल ईंट लगाई गई। सीमेंट और रेत भी निम्न स्तर की इस्तेमाल की गई। नतीजा, अल्प वर्षा में ही नवनिर्मित दोनों भवनों की छत और दीवारों में सीपेज साफ नजर आने लगा है। खिड़की- दरवाजे भी घटिया किस्म के लगाए गए हैं, जो टीन के पतले चादर से बने हैं और जो ठीक से खुल- बंद भी नही हो रहे। स्कूल परिसर को समतल करने के बजाय उबड़- खाबड़ छोड़ दिया गया है, जिससे बरसाती दिनों में पानी के ठहराव से कीचड़ होगा और स्कूल संचालन ठप हो जाएगा। सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि समीप एसईसीएल खदान में कोयला उत्खनन के लिए हो रही ब्लास्टिंग से स्कूल के प्रथम सत्र के संचालन के दौरान ही दीवारों में दरारें आ गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि कमजोर निर्माण वाले इन भवनों में यदि ब्लास्टिंग से भविष्य में कोई हादसा हो जाता है और बच्चों की जान का खतरा हो जाता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? वहीं स्कूल तक बिजली पहुँचाने के लिए 300 मीटर दूर खंभे से वैकल्पिक तार खींची गई है, जो पेड़ों की टहनियों से होते हुए भवन तक गई है। आंधी- बारिश में यदि पेड़ की डंगाल के साथ करंट वाला तार टूटकर गिरा तो भयंकर हादसा हो सकता है। बच्चों की सुरक्षा से यह सीधा खिलवाड़ है। खनन प्रभावित ग्राम के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बजाय घटिया निर्मित भवन सौंपना सुशासन पर बड़ा सवाल है। इस निर्माण को लेकर पालकों में दहशत व्याप्त है, उनकी कलेक्टर से मांग है कि अविलंब तकनीकी टीम भेजकर दोनों स्कूल भवन की गुणवत्ता जांच कराई जाए और स्टीमेट के अनुसार काम न करने वाले सरपंच- सचिव और इंजीनियर पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए राशि की रिकवरी हो, साथ ही दोनों भवनों की गुणवत्ता और बच्चों की जान पर मंडराने वाले खतरे की स्थिति पर सुधार कराया जाए। उन्होंने कहा है कि यदि जल्द इस दिशा पर कार्रवाई नही हुई तो वे अपने बच्चों को स्कूल नही भेजेंगे। उक्त शाला भवनों के निर्माण और चयनित स्थल में व्याप्त अव्यवस्था तथा मामले में पंचायत की अनदेखी मामले को अगले खबर में प्रसारित किया जाएगा।




