छत्तीसगढ़

CG – पचपेड़ी में व्यवहार न्यायालय खोलने की उठी मांग व्यापारियों और ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के पचपेड़ी तहसील क्षेत्र में लंबे समय से व्यवहार न्यायालय की मांग उठ रही है। अब इस मांग को लेकर स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के सामने आवाज बुलंद की है। व्यापारी संघ पचपेड़ी के उपाध्यक्ष रमेश सूर्यकांत के नेतृत्व में कलेक्टर बिलासपुर को आवेदन सौंपकर तहसील मुख्यालय पचपेड़ी में व्यवहार न्यायालय खोलने की मांग की गई है। आवेदन में बताया गया कि पचपेड़ी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को छोटे-बड़े न्यायिक कार्यों के लिए करीब 60 किलोमीटर दूर बिलासपुर आना पड़ता है, जिससे आम जनता को आर्थिक, शारीरिक और समय संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यदि पचपेड़ी में व्यवहार न्यायालय शुरू हो जाता है तो क्षेत्र के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

पचपेड़ी क्षेत्र के लोगों को हो रही परेशानी..

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि जॉघरा सहित आसपास के गांवों से बिलासपुर की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। न्यायालय संबंधी कार्यों के लिए लोगों को बार-बार जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

आर्थिक और शारीरिक बोझ बढ़ने की बात कही..

स्थानीय लोगों ने बताया कि न्यायालय के मामलों में तारीख पर उपस्थित होने के लिए यात्रा खर्च, मजदूरी का नुकसान और पूरे दिन का समय लग जाता है। कई ग्रामीण आर्थिक रूप से कमजोर हैं, ऐसे में बार-बार बिलासपुर आना उनके लिए भारी पड़ता है। आवेदन में कहा गया है कि पचपेड़ी में व्यवहार न्यायालय खुलने से इन समस्याओं से राहत मिलेगी।

व्यापारियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से की मांग..

व्यापारी संघ पचपेड़ी के उपाध्यक्ष रमेश सूर्यकांत ने कहा कि तहसील क्षेत्र की बढ़ती आबादी और जरूरतों को देखते हुए अब यहां व्यवहार
न्यायालय खोलना जरूरी हो गया है। इससे न केवल पचपेड़ी बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने जिला प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक पहल करने की मांग की है।

आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत
स्थानीय लोगों का मानना है कि व्यवहार न्यायालय खुलने से लोगों को छोटे-छोटे न्यायिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय की बचत होगी और ग्रामीणों को न्यायिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगा।

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