
छत्तीसगढ़ धमतरी जिले के नगरी विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यहां स्कूली बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर उफनते पानी के बीच टूटा पुल पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
नगरी विकासखंड के गणेश घाट–देउरपारा मार्ग पर लोक निर्माण विभाग की लापरवाही का खामियाजा अब मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। करीब 1 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए पुराने पुल को तोड़कर अस्थायी पुल बनाया गया था, लेकिन लगातार बारिश और तेज बहाव में वह भी टूट गया।
अब हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे बच्चे बहते पानी के बीच से जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। कहीं परिजन बच्चों को गोद में उठाकर पुल पार करा रहे हैं, तो कहीं लोग खुद जान जोखिम में डालकर रास्ता पार कर रहे हैं। यह दृश्य किसी बड़े हादसे की आशंका को साफ दिखाता है।
इस मार्ग के उस पार स्थित दो स्कूलों में प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ने जाते हैं। पुल टूटने के बाद कई बच्चे बीच रास्ते से ही वापस लौट रहे हैं, जबकि अभिभावक मजबूरी में 7 से 8 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाकर बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पीडब्ल्यूडी समय पर पुल निर्माण पूरा कर देता या सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करता, तो आज ऐसी स्थिति नहीं बनती। बरसात के मौसम में अधूरा निर्माण और टूटी व्यवस्था ने पूरे इलाके की परेशानी बढ़ा दी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से तत्काल सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने और पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
फिलहाल सवाल यही है कि आखिर मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी, या फिर समय रहते इस समस्या का समाधान किया जाएगा?