छत्तीसगढ़

CG – विवादित वनभूमि पर पौधारोपण रोकने एवं किसानों के अधिकारों की रक्षा की मांग, कलेक्टर एवं वन मंडल अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन…

विवादित वनभूमि पर पौधारोपण रोकने एवं किसानों के अधिकारों की रक्षा की मांग, कलेक्टर एवं वन मंडल अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

जगदलपुर। बस्तर जिले के प्रभावित किसानों ने पूर्व युवा कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष एवं आदिवासी नेता हेमंत कश्यप के नेतृत्व में आज कलेक्टर बस्तर एवं वन मंडल अधिकारी बस्तर, जगदलपुर को ज्ञापन सौंपकर विवादित वनभूमि पर प्रस्तावित पौधारोपण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि संबंधित किसान 09 जुलाई 1971 के पूर्व से उक्त भूमि पर झाड़ियों की सफाई कर खेती-किसानी करते आ रहे हैं। भूमि से संबंधित विभिन्न प्रकरण वर्षों से विचाराधीन रहे हैं तथा वन विभाग द्वारा संस्थित प्रकरण क्रमांक 249/10 की सुनवाई वर्ष 2011 में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद भूमि से जुड़े मामलों का अंतिम निराकरण आज तक नहीं हो पाया है तथा वर्तमान में कुछ प्रकरण पुनः विचाराधीन हैं।

हेमंत कश्यप ने कहा कि वन अधिकार मान्यता अधिनियम, 2006 के तहत समान परिस्थितियों में अनेक किसानों को वन अधिकार पट्टे प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि कई पात्र किसानों के दावे आज भी लंबित हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय से पूर्व विवादित भूमि पर पौधारोपण कार्य प्रारंभ करना किसानों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है तथा भविष्य में अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी एवं वनाश्रित परिवार पीढ़ियों से उक्त भूमि पर आश्रित हैं और अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जब तक लंबित दावों एवं प्रकरणों का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक प्रशासन एवं वन विभाग को यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए। किसानों के दावों और अधिकारों की अनदेखी कर किसी भी प्रकार का पौधारोपण कार्य कराया जाना न्यायसंगत नहीं होगा।

ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर बस्तर एवं वन मंडल अधिकारी बस्तर से मांग की गई है कि विवादित भूमि पर प्रस्तावित पौधारोपण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा लंबित वन अधिकार दावों एवं संबंधित प्रकरणों का शीघ्र एवं निष्पक्ष निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

हेमंत कश्यप ने कहा कि किसानों, आदिवासियों एवं वनाश्रित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। यदि किसानों की जायज मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो प्रभावित ग्रामीणों के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित विभाग की होगी।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रभावित किसान, ग्रामीणजन एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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