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सेवा संकल्प अभियान : पोषण पुनर्वास केंद्र बने कमजोर बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र

सितम्बर तक 2372 बच्चों का उपचार, 2229 हुए सुपोषित

सेवा संकल्प अभियान : पोषण पुनर्वास केंद्र बने कमजोर बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र

सितम्बर तक 2372 बच्चों का उपचार, 2229 हुए सुपोषित

 

बेमेतरा, 29 सितंबर 2026। किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौटना, उसका वजन बढ़ना और फिर से सामान्य बचपन की ओर बढ़ना केवल स्वास्थ्य से जुड़ा आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए राहत और उम्मीद की बात होती है। बेमेतरा जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों में जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ऐसे ही बदलाव की कहानी लिख रहा है।

जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के प्रयासों के बीच सितम्बर 2026 तक जिले के एनआरसी में 2372 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें 2229 बच्चे उपचार के बाद सुपोषित हुए। ये आंकड़े बताते हैं कि समय पर पहचान, उपचार, पोषण और निरंतर देखभाल से बच्चों को स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाया जा सकता है।

 

घर-घर पहचान से शुरू होती है सेवा की कहानी

 

कुपोषण से जूझ रहे बच्चों तक पहुंचने का काम केवल अस्पताल में नहीं, घर से शुरू होता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से बच्चों की पहचान की जाती है। गंभीर कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप उपचार और पोषण प्रबंधन किया जाता है।

 

यहाँ बच्चे की चिकित्सकीय निगरानी के साथ पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस दौरान माताओं और परिजनों को भी समझाया जाता है कि घर पर किस प्रकार का पौष्टिक भोजन दिया जाए, स्वच्छता का ध्यान कैसे रखा जाए और बच्चे के स्वास्थ्य में बदलाव को कैसे पहचाना जाए। उपचार केवल बच्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार को भी बेहतर देखभाल के लिए तैयार किया जाता है।

 

15 दिन की विशेष देखभाल से स्वस्थ होकर घर वापसी

 

एनआरसी में भर्ती बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी और विशेष पोषण देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। उपचार अवधि के दौरान वजन और स्वास्थ्य में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जाती है। माताओं को पौष्टिक भोजन तैयार करने और नियमित देखभाल की व्यवहारिक जानकारी दी जाती है।

 

उपचार पूरा होने के बाद भी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। छुट्टी के बाद नियमित निगरानी और गृह भ्रमण के जरिए बच्चे के स्वास्थ्य पर नजर रखी जाती है, ताकि वह दोबारा कुपोषण की स्थिति में न पहुंचे।

 

यह केंद्र कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश और स्वास्थ्य विभाग की टीम के समर्पित प्रयासों से “कुपोषण मुक्त बेमेतरा – स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ छत्तीसगढ़”  के लक्ष्य को साकार कर रहा है।

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